गाजियाबाद: शहर के साथ 13 गांवों का पानी हरनंदी नदी को कर रहा दूषित, कई जगह ऑक्सीजन लेवल 'शून्य'
गाजियाबाद की हरनंदी नदी शहर और 13 गांवों के दूषित पानी से गंभीर रूप से प्रदूषित हो रही है, जिससे ...और पढ़ें

हरनंदी नदी की फोटो। जागरण
HighLights
शहर और 13 गांवों का दूषित पानी नदी में।
हरनंदी नदी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर शून्य।
जलीय जीवन खतरे में, नदी 'डेड रिवर' घोषित।
हसीन शाह, गाजियाबाद। हरनंदी नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन उन्हें धरातल पर नहीं उतारा गया। नदी में गिर रहे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के सीवर, नालों के दूषित पानी और ठोस कचरे के कारण हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं।
शहर के साथ गाजियाबाद के 13 गांवों का गंदा पानी नदी को प्रदूषित कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नदी के कई हिस्सों में घुलित आक्सीजन (डीओ) का स्तर इतना कम हो गया है कि जलीय जीवन पर संकट खड़ा हो गया है।
नदी को स्वच्छ बनाने के लिए फाइटो रेमेडिएशन तकनीक के तहत ऐसे विशेष पौधे लगाने की योजना बनाई गई थी, जो पानी में मौजूद अमोनिया, पोटेशियम और अन्य प्रदूषकों को अवशोषित कर जल की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं।
मंडलायुक्त ने भी दिए थे निर्देश
योजना के तहत मुरादनगर ब्लाक के सुराना, सुठारी, भदौली, कुन्हैड़ा, रेवड़ी-रेवड़ा, खोराजपुर, मतौर और नेकपुर साबितनगर, लोनी ब्लाक के असालतनगर फर्रूखनगर, भनैड़ा खुर्द, सिरोरा सलेमपुर, मुर्तजा भूपखेड़ी तथा रजापुर ब्लाक के मकरेड़ा महमूदाबाद गांवों में कार्य प्रस्तावित था। इसके अलावा नदी में गाद रोकने के लिए सिल्ट कैचर और कचरा रोकने के लिए फिल्टर चैंबर बनाए जाने थे।
मंडलायुक्त मेरठ ने भी इस दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकांश कार्य अब तक अधूरे हैं। कोई कार्य धरातल पर नहीं किया जा रहा है। स्थिति यह है कि इन 13 गांवों के साथ-साथ नगर निगम क्षेत्र की कई कालोनियों का दूषित पानी आज भी हरनंदी में पहुंच रहा है। नदी में आक्सीजन की कमी के कारण मछलियों और अन्य जलीय जीवों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
डेड रिवर की श्रेणी में हरनंदी
केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों की रिपोर्टें भी नदी की खराब हालत की पुष्टि करती हैं। वर्ष 2015 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने हरनंदी को डेड रिवर की श्रेणी में रखा था। नदी की जल गुणवत्ता श्रेणी ''''ई'''' पाई गई है, जिसका अर्थ है कि यह पानी केवल सिंचाई, औद्योगिक शीतलन और नियंत्रित अपशिष्ट निस्तारण के लिए ही उपयुक्त है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि जब तक सभी नालों का शत-प्रतिशत उपचार, गांवों में सीवरेज व्यवस्था और नदी किनारे ठोस कचरा प्रबंधन सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, तब तक नदी को स्वच्छ बनाने के प्रयास अधूरे रहेंगे।
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हरनंदी में ऑक्सीजन की स्थिति चिंताजनक
| मानक | स्थिति |
|---|---|
| जलीय जीवों के लिए आवश्यक डीओ | कम से कम 4 मिग्रा/लीटर |
| हरनंदी में दर्ज डीओ स्तर | 1.43 से 4.22 मिग्रा/लीटर |
| करहेड़ा, मोहन नगर, छिजारसी क्षेत्र | कई बार 1 मिग्रा/लीटर से कम |
| कुछ स्थानों पर डीओ | शून्य तक दर्ज |
| हालिया सर्वेक्षण | कई हिस्सों में ऑक्सीजन पूरी तरह खत्म पाई गई |
