नोएडा के ट्विन टावर जैसा एक्शन गाजियाबाद में भी, गिराए जाएंगे गुलमोहर ग्रीन्स के 2 टावर; HC का बड़ा फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में अवैध निर्माण पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दो ...और पढ़ें
HighLights
गुलमोहर ग्रीन्स के दो टावर ध्वस्त करने का आदेश।
चार अन्य टावरों की नौवीं-दसवीं मंजिलें हटेंगी।
बिल्डर पर 25 लाख जुर्माना, GDA अधिकारियों की जांच।
शाहनवाज अली, गाजियाबाद। नोएडा के ट्विन टावर गिराए जाने की याद एक बार फिर ताजा होने वाली है। गाजियाबाद के मोहननगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में अवैध निर्माण पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसका असर बिल्डर से लेकर GDA तक पर पड़ेगा।
अदालत ने सोसायटी के टावर संख्या 27 और 28 को पूरी तरह ध्वस्त करने और चार अन्य टावरों की नौवीं व दसवीं मंजिल हटाने का आदेश दिया है। कार्रवाई दो महीने में पूरी करनी होगी।
बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाने के साथ अदालत ने प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष की भूमिका की विभागीय जांच के भी निर्देश दिए हैं।
आखिर क्यों तोड़ने पड़ेंगे टावर?
इस विवाद की जड़ वर्ष 2006 में स्वीकृत आवासीय परियोजना के नक्शे और बाद में हुए निर्माण में है। मूल योजना में 34 टावर और 904 आवासीय इकाइयां प्रस्तावित थीं। बाद में निर्माण में बदलाव के लिए कई बार शमन की प्रक्रिया अपनाई गई।
18 दिसंबर 2024 को जारी तीसरे शमन आदेश के तहत टावर 16 से 19 की नौवीं, 10वीं मंजिल और टावर 27 व 28 के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। सोसायटी के निवासियों ने इसी आदेश को अदालत में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने तीसरे शमन आदेश को निरस्त कर दिया।
एयरफोर्स की जमीन से लेकर बिक्री तक सवाल
मामले में भारतीय वायुसेना के कब्जे वाली 4,560 वर्गमीटर जमीन को भूखंड के क्षेत्रफल में शामिल कर फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की गणना करने पर भी सवाल उठे।
अदालत ने माना कि ऐसी जमीन के आधार पर निर्माण की अतिरिक्त अनुमति नहीं दी जा सकती, जिस पर बिल्डर का वैध अधिकार नहीं है। इसके अलावा सोसायटी के साझा क्षेत्रों को 85 लोगों को बेचने का मामला भी सामने आया।
अदालत ने इन क्षेत्रों की पहचान कर अवैध निर्माण हटाने और उन्हें सोसायटी को वापस दिलाने के निर्देश दिए हैं। संबंधित खरीदारों को रकम लौटाने के साथ निर्धारित निर्माण लागत पर 10 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश भी दिया गया है।
बिना पूर्णता प्रमाणपत्र कैसे मिला कब्जा?
अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अनिवार्य पूर्णता प्रमाणपत्र (सीसी) के बिना फ्लैटों का कब्जा कैसे दिया गया। बिल्डर के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर एफआइआर दर्ज करने और जांच अतिरिक्त पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश हैं।
वहीं, GDA के तत्कालीन उपाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच और मामले में लापरवाही बरतने वाले निरीक्षक के निलंबन के आदेश दिए गए हैं। प्राधिकरण को प्रत्येक याचिकाकर्ता को दो महीने के भीतर 50 हजार रुपये देने का निर्देश भी दिया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ प्राधिकरण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएगा। इसके लिए जल्द ही विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की जाएगी। एसएलपी दाखिल करने के साथ ही हाईकोर्ट के आदेश में दिए गए सभी निर्देशों का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई की समयबद्ध योजना तैयार की जाएगी।
-विवेक मिश्र, सचिव GDA
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