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गाजियाबाद में बिजली कनेक्शन पर बड़ा 'खेल', अवैध कॉलोनियों में बिछ रहा जाल; दावों की खुली पोल

Published: Tue, 25 Aug 2026 01:37 PM (IST)

गाजियाबाद में अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर रोक के दावों के बावजूद, अब एक मकान पर भी बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं।

गाजियाबाद में अवैध कॉलोनियों में बिछ रह बिजली का जाल। जागरण

गाजियाबाद में अवैध कॉलोनियों में बिछ रह बिजली का जाल। जागरण

HighLights

  1. गाजियाबाद की अवैध कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं।

  2. नई व्यवस्था में एक मकान पर भी कनेक्शन संभव हुआ।

  3. अब तक जिले में लगभग 200 कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

लक्ष्य चौधरी, गाजियाबाद। एक ओर अवैध कॉलोनियों के निर्माण व विस्तार पर रोक लगाने के दावे किया जाते हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं कॉलोनियों में बिजली का जाल बिछ रहा है।

बदली व्यवस्था के तहत पिछले साल से अविकसित और अविद्युतीकृत कॉलोनी में एक मकान होने पर भी बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है। जिले में अब तक करीब 200 कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

सबसे बड़ा सवाल?

बिजली जैसी मूलभूत सुविधा पहुंचने से इन कॉलोनियों में बसावट और नए निर्माण को बढ़ावा मिलने की संभावना है। ऐसे में सवाल यह भी है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई शुरू होने से पहले वहां पानी, बिजली जैसी सुविधाएं पहुंचने से क्या उन्हें परोक्ष रूप से विकसित होने का आधार मिल रहा है।

नई व्यवस्था में हटा दी शर्त

पहले किसी कॉलोनी के विद्युतीकरण के लिए 50 प्रतिशत प्लाटों पर मकान और 25 प्रतिशत मकानों में आबादी होने की शर्त थी। इस कारण कम बसावट वाली कॉलोनियों में बिजली पहुंचने में समय लगता था। नई व्यवस्था में यह शर्त हटा दी गई। अब एक मकान होने पर भी उपभोक्ता 71.5 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से धनराशि जमा कर बिजली कनेक्शन ले सकता है। इसके लिए विद्युत निगम 250 मीटर तक लाइन का विस्तार करता है।

जिले में 200 कनेक्शन दिए जा चुके

बताया कि एक बार लाइन पहुंचने के बाद उसी कॉलोनी के अन्य उपभोक्ताओं के लिए भी कनेक्शन का रास्ता आसान हो जाता है। नई व्यवस्था के तहत जिले में करीब 200 कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इनमें जोन-प्रथम में 70 कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि जोन-दो और जोन-तृतीय में कुल 130 कनेक्शन दिए गए हैं।

मुरादनगर, लोनी, गोविंदपुरम, अकबरपुर बहरामपुर और सिद्धार्थ विहार समेत विभिन्न क्षेत्रों में स्थित अविकसित और अवैधीकृत कॉलोनियों के लोगों को इसका लाभ मिल रहा है।

झटपट पोर्टल से आवेदन, फिर बनता है एस्टीमेट

अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार सिंह के अनुसार बिजली मूलभूत सुविधाओं में शामिल है। उपभोक्ता झटपट पोर्टल पर आवेदन करता है तो निगम नियमानुसार एस्टीमेट तैयार कर आगे की प्रक्रिया पूरी करता है।

एस्टीमेट के अनुसार, धनराशि जमा होने के बाद कनेक्शन दिया जाता है। यही प्रक्रिया है इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसके अलावा संबंधित विकास प्राधिकरण द्वारा आपत्ति दर्ज करने पर कनेक्शन विच्छेदन कर दिया जाता है।

प्राधिकरण की आपत्ति पर ही लग सकती है रोक

विद्युत निगम का कहना है कि यदि संबंधित विकास प्राधिकरण किसी कालोनी के अवैध होने पर आपत्ति दर्ज कराता है या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद आदेश देता है, तो कनेक्शन पर रोक लगाई जाती है। यानी प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट आपत्ति या आदेश आने से पहले विद्युत निगम के पास नियमानुसार आवेदन मिलने पर कनेक्शन देने की प्रक्रिया जारी रहती है। कार्रवाई होने पर कनेक्शन स्थगित किया जाता है।

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पहले ही कार्रवाई हो तो नहीं पहुंचेंगे कनेक्शन

विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि यदि अवैध कालोनियों में निर्माण शुरू होते ही विकास प्राधिकरण प्रभावी कार्रवाई करे तो वहां बसावट ही विकसित नहीं होगी। ऐसी स्थिति में बिजली कनेक्शन के आवेदन भी नहीं आएंगे। लेकिन जब तक कार्रवाई होती है, कई स्थानों पर मकान बन जाते हैं और लोग रहने लगते हैं। इसके बाद बिजली जैसी मूलभूत सुविधा की मांग शुरू होती है और निगम को नियमानुसार आवेदन पर निर्णय लेना पड़ता है।