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गाजियाबाद में ड्राइविंग लाइसेंस के नए नियम पर विवाद, बिना टेस्ट ₹6000 में मिलेगा लाइसेंस

Published: Sun, 30 Aug 2026 10:54 PM (IST)

गाजियाबाद में ड्राइविंग टेस्ट में फेल होने पर अब ₹6000 शुल्क देकर एक महीने का प्रशिक्षण लेना होगा, जिसके बाद ...और पढ़ें

गाजियाबाद में ड्राइविंग टेस्ट में फेल होने पर अब ₹6000 शुल्क देकर एक महीने का प्रशिक्षण लेना होगा।

गाजियाबाद में ड्राइविंग टेस्ट में फेल होने पर अब ₹6000 शुल्क देकर एक महीने का प्रशिक्षण लेना होगा।

HighLights

  1. फेल होने पर ₹6000 देकर प्रशिक्षण अनिवार्य।

  2. प्रशिक्षण के बाद बिना दोबारा टेस्ट लाइसेंस।

  3. नई व्यवस्था पर सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल।

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। सड़क पर वाहन चलाने की वास्तविक क्षमता परखने के लिए गुलधर स्थित जिले के एक मात्र प्रत्यायन चालन प्रशिक्षण केंद्र (एडीटीसी) में लागू नई व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट में फेल होने वाले आवेदकों को अब एक सप्ताह के बाद 300 रुपये देकर दोबारा टेस्ट देने के बजाय छह हजार रुपये शुल्क देकर एक महीने का प्रशिक्षण लेना होगा।

प्रशिक्षण के बाद एडीटीसी केंद्र की ओर से सारथी पोर्टल पर फार्म-5बी जनरेट किया जाएगा और इसके आधार पर आवेदक को दोबारा ड्राइविंग टेस्ट दिए बिना स्थायी लाइसेंस जारी किया जाएगा। शासन स्तर से यह नई व्यवस्था करीब 12 दिन पहले से लागू की गई है।

जिले में इस नई व्यवस्था को लेकर आवेदकों और वाहन चालकों के बीच विरोध शुरू हो गया है। वाहन स्वामियों का सवाल है कि जब स्वचालित टेस्ट में पहली बार अभ्यर्थी को वाहन चलाने के मानकों पर खरा नहीं पाया गया तो प्रशिक्षण के बाद उसकी दक्षता की अंतिम परीक्षा क्यों नहीं होगी।

बिना दोबारा टेस्ट के लाइसेंस जारी होने की व्यवस्था सड़क सुरक्षा के उद्देश्य को ही कमजोर करती दिखाई दे रही है। पहले फेल होने वाले आवेदक एक सप्ताह बाद 300 रुपये शुल्क जमा कर दोबारा टेस्ट दे सकते थे और पास होने तक प्रक्रिया दोहरा सकते थे।

परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य फेल आवेदकों को दोबारा टेस्ट में भेजने के बजाय प्रशिक्षित कर ड्राइविंग के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षण के बाद फार्म-5बी की प्रक्रिया पूरी कर उसे सारथी पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। मोटर वाहन निरीक्षक विवेक खरवार ने बताया कि अभी इस व्यवस्था के तहत किसी आवेदक का आवेदन नहीं आया है। हालांकि शासनादेश लागू हो गया है और अब इसी के मुताबिक प्रक्रिया होगी।

लोगों ने उठाए टेस्ट पर सवाल

नई व्यवस्था का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि छह हजार रुपये खर्च कर प्रशिक्षण लेने के बाद यदि दोबारा स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ही नहीं होगा तो यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि आवेदक वास्तव में वाहन चलाने के योग्य हो गया है। विजयनगर निवासी राम कुमार ने कहा कि उनका बेटा एक बार स्थायी लाइसेंस में फेल हो गया, दोबारा प्रयास में पास हो गया।

ऐसे तो एडीटीसी केंद्र में व्यापार शुरू हो जाएगा। लोग जानबूझकर फेल किया जाएगा और फिर उनसे प्रशिक्षण के लिए छह हजार रुपये लिए जाएंगे। वहीं भोजपुर के निवासी विजय चौधरी ने कहा कि प्रशिक्षण केंद्रों पर जिस तरह वाहन चलाने की परीक्षा होती है, वह जटिल है।

पहली बार में लोग परीक्षा केंद्र की तकनीकी पहलुओं को समझते हैं और दूसरी बार में कई आवेदक पास हो जाते हैं। लोगों की मांग है कि प्रशिक्षण के बाद अंतिम ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य किया जाए, ताकि सड़क पर उतरने वाले प्रत्येक चालक की दक्षता प्रमाणित हो सके।

एडीटीसी सेंटर पर जनवरी से अगस्त तक बने ड्राइविंग लाइसेंस का विवरण

माह ड्राइविंग लाइसेंस
जनवरी 563
फरवरी 1794
मार्च 1802
अप्रैल 2469
मई 2646
जून 2401
जुलाई 2318
अगस्त 1874

जिन जिलों में एडीटीसी सेंटर नहीं, वहां पूर्व व्यवस्था

प्रदेश में आगरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा, अलीगढ़, लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, पीलीभीत, बिजनौर, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, फर्रूखाबाद, सोनभद्र में ही एडीटीसी सेंटर संचालित हैं। प्रदेश के सभी जिलों में एडीटीसी सेंटर नहीं हैं। ऐसे में वहां पर वर्तमान व्यवस्था के तहत ही डीएल जारी किए जाएंगे।

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