लक्ष्य 25 लाख, फिर 9 लाख पर क्यों अटकी आभा ID? गाजियाबाद में सुस्त रफ्तार से कटघरे में अधिकारी
गाजियाबाद में आभा आईडी बनाने की मुहिम धीमी गति से चल रही है, जहाँ 25.87 लाख के लक्ष्य के मुकाबले केवल 9.60 लाख आईडी ही बन पाई हैं।

जिले में कितने प्रतिशत लोगों की बनी आभा आईडी? (AI-Generated)
HighLights
गाजियाबाद में आभा आईडी बनाने की गति धीमी, लक्ष्य से पीछे।
शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण इलाकों की तुलना में कम प्रगति दर्ज।
25.87 लाख के लक्ष्य के सापेक्ष 9.60 लाख आईडी बनीं।
मदन पांचाल, गाजियाबाद। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से लोगों को जोड़ने के लिए चलाई जा रही आभा आईडी बनाने की मुहिम में गाजियाबाद जिला पिछड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के 16 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 25.87 लाख लोगों के सापेक्ष केवल 9.60 लाख लोगों की ही आभा आईडी बनाई जा सकी है। इस तरह जिले में लक्ष्य के मुकाबले महज 37.14 प्रतिशत लोगों की आईडी बन पाई है।
क्या कहते हैं आंकड़े
अधिकारियों की ओर से लगातार निर्देश दिए जाने के बावजूद अभियान की रफ्तार धीमी बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है। भोजपुर में 2.62 लाख लोगों के सापेक्ष 1.70 लाख आभा आईडी बनाई गई हैं।
यहां उपलब्धि 64.95 प्रतिशत है। मुरादनगर ग्रामीण क्षेत्र में 1.66 लाख लोगों में से 1.08 लाख की आईडी बनी है, जो 65.24 प्रतिशत है। लोनी में 1.54 लाख लोगों के सापेक्ष 93,954 आईडी बनी हैं। यहां उपलब्धि 60.97 प्रतिशत है। रजापुर में 2.12 लाख लोगों के सापेक्ष 1.26 लाख आईडी बनी हैं, जो 59.49 प्रतिशत है।
गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र में कितने?
इसके उलट शहरी निकायों में अभियान काफी पीछे है। गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र में 11.68 लाख लोगों के सापेक्ष 2.94 लाख आभा आईडी बनी हैं। यहां उपलब्धि 25.19 प्रतिशत है। खोड़ा मकनपुर नगर पालिका में 1.53 लाख लोगों के सापेक्ष 37,821 आईडी बनी हैं, जो 24.61 प्रतिशत है। लोनी नगर पालिका में 3.28 लाख लोगों में से 80,122 की आईडी बनी हैं।
यहां उपलब्धि 24.40 प्रतिशत है। मोदीनगर नगर पालिका में 1.06 लाख लोगों के सापेक्ष 41,654 आईडी बनाई गई हैं, जो 39.06 प्रतिशत है। वहीं, मुरादनगर नगर पालिका में 35,218 लोगों के सापेक्ष केवल 7,730 आईडी बनी हैं। यहां उपलब्धि 21.95 प्रतिशत है, जो सभी क्षेत्रों में सबसे कम है।
आभा आईडी के माध्यम से व्यक्ति के स्वास्थ्य संबंधी अभिलेखों को डिजिटल रूप से जोड़ने की व्यवस्था है। जिले में अभी 16.26 लाख से अधिक लोगों की आईडी बनाया जाना बाकी है। आंकड़े बताते हैं कि अभियान में तेजी लाने के लिए खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
