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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का बिल्डरों पर शिकंजा, जयपुरिया सनराइज ग्रीन टाउनशिप को लेकर मुकदमा दर्ज

Published: Sun, 30 Aug 2026 10:07 AM (IST)

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने जयपुरिया सनराइज ग्रीन और शौर्यपुरम इंटीग्रेटेड टाउनशिप के निदेशकों पर मुकदमा दर्ज कराया है।

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HighLights

  1. जीडीए ने दो टाउनशिप निदेशकों पर मुकदमा दर्ज किया।

  2. 19 साल बाद भी विकास कार्य अधूरे, प्लॉट बेचे गए।

  3. सीवर, सड़क, पार्क जैसे मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं।

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। गाजियाबाद में वेव सिटी क्षेत्र के शाहपुर बम्हेटा में विकसित की जा रही जयपुरिया सनराइज ग्रीन और शौर्यपुरम इंटीग्रेटेड टाउनशिप को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई की है।

स्वीकृत लेआउट के मुताबिक, विकास कार्य पूरे नहीं करने और इसके बावजूद प्लॉटों की बिक्री जारी रखने के आरोप में प्राधिकरण ने दो निदेशकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

जीडीए के अवर अभियंता की शिकायत ओर एमएसएमई एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सूर्यकांत जयपुरिया और शौर्यपुरम इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अनिल जैन को आरोपी बनाया गया है।

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300 एकड़ में टाउनशिप

प्राधिकरण ने शाहपुर बम्हेटा गांव की जमीन पर करीब 300 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने के लिए योजना स्वीकृत हुई थी। पहले चरण में 180 एकड़ की योजना तैयार की गई और 13 फरवरी 2007 को डेवलपमेंट एग्रीमेंट हुआ।

19 साल बाद भी काम पूरा नहीं

योजना को 5 वर्ष में पूरा किया जाना था, लेकिन 19 वर्षों बाद भी इसे पूरी तरह विकसित नहीं किया गया। प्राधिकरण का आरोप है कि स्वीकृत लेआउट के अनुसार, सीवर, जल निकासी, पानी की लाइन व टंकी, सड़क, नाली, पार्क, कूड़ा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट और बिजली कनेक्शन समेत कई जरूरी विकास कार्य पूरे नहीं किए गए।

वहीं, सुरक्षा और रखरखाव की स्थिति को लेकर भी निवासियों की ओर से लगातार शिकायतें आती रहीं। जीडीए ने 2020 से लेकर 2025 तक कई बार बिल्डर और उसके प्रतिनिधियों को नोटिस दिए और बैठकें कर विकास कार्य पूरे करने के निर्देश दिए।

रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया

इसके बावजूद प्राधिकरण के मुताबिक, अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। वर्ष 2022 में स्वीकृत मानचित्र, विकसित और अध्यासित फ्लैटों आदि का विवरण भी मांगा गया था, लेकिन उसका भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।

मामले में जीडीए ने यह भी आरोप लगाया है कि अधूरी सुविधाओं के बावजूद स्थानीय निवासियों के साथ धोखाधड़ी करते हुए प्लॉटिंग और बिक्री का काम जारी रखा गया।

जयपुरिया सनराइज ग्रीन में करीब 30 फीट गहरे गड्ढे में सीवर और बरसात का पानी जमा होने का उल्लेख भी शिकायत में किया गया है, जिससे हादसे की आशंका जताई गई थी। यह भी आरोप है कि बिल्डर ने गरीबों के लिए एलआइजी और ईडब्लूएस फ्लैट भी बनाकर नहीं दिए हैं।

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