जासं, गाजियाबाद : साइबर ठगों ने रिटायर्ड इंजीनियर की 77 वर्षीय पत्नी के बैंक खाते से पेटीएम के माध्यम से 5.84 लाख रुपये निकाल लिए। ठगों ने सात माह में 60-70 बार ट्रांजैक्शन की। एक माह पूर्व उन्हें बैंक से मैसेज मिला तो ठगी का पता चला। रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण छड़ी के सहारे चलने वाली पीड़िता महीने भर बैंक शाखा, कविनगर थाना, एसएसपी व एसपी सिटी ऑफिस और साइबर सेल के चक्कर काटती रहीं। पुलिस का पूरा प्रयास था कि पीड़िता ठगी का जख्म भूल जाए, लेकिन बुजुर्ग महिला ने हार नहीं मानी। वह संवेदनहीन अधिकारियों की दर पर बार-बार दस्तक देती रहीं, बिना थके-बिना रुके। अंतत: पुलिस ने शनिवार को उनकी रिपोर्ट दर्ज की। ठगी में करीबी शामिल

हरियाणा पीडब्ल्यूडी में एक्सईएन के पद से रिटायर आरके गर्ग कविनगर के-ब्लॉक में पत्नी प्रेमलता गर्ग के साथ रहते हैं। उनके बेटे पंकज की हादसे में मौत हो चुकी है, जबकि बेटी मोनिका शादी के बाद गुरुग्राम में रहती हैं। आरके गर्ग अल्जाइमर से पीड़ित हैं और प्रेमलता भी स्पाइन में चोट के कारण लंबे समय तक बेड पर रहीं। 19 अक्टूबर को मैसेज आया कि उनके ओबीसी खाते में 2.54 लाख रुपये हैं, जबकि खाते में करीब नौ लाख रुपये थे। उन्होंने एक लाख रुपये ही खर्च किए थे। इसी दिन पेटीएम खाते का पासवर्ड बदले जाने की जानकारी मिली। आरोप है कि इससे पहले कोई मैसेज नहीं मिला। पीड़िता ने गैस व बिजली का बिल भरने के लिए पेटीएम शुरू किया था। करीब एक हफ्ते चक्कर काटने के बाद बैंक से जानकारी दी गई कि सभी ट्रांजैक्शन पेटीएम के माध्यम से की गई हैं। प्रेमलता ने बताया कि वह बिल भरते समय में अपने ड्राइवर या नौकरों की मदद से डेबिट कार्ड से पेटीएम में रुपये जुड़वाती थीं।

एसएचओ कविनगर अनिल कुमार शाही ने बताया कि शनिवार को रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है। आशंका है कि ठगी में कोई करीबी शामिल है। बॉक्स..

संवेदनहीनता का लगाया आरोप

प्रेमलता ने प्रोजेक्ट सवेरा का जिक्र कर कहा, कि ऐसी पुलिस बुजुर्गों का विश्वास कैसे जीतेगी? बैंक व पुलिस अधिकारियों पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। पहली बार वह तीन नवंबर को थाना गईं। आरोप है कि दो बार तहरीर लिखवाकर लौटा दिया। साइबर सेल में वह दो मंजिल तक सीढि़यां नहीं चढ़ पाईं और इंचार्ज ने नीचे आने से मना कर दिया। आरोप है कि बैंक मैनेजर भी भूतल पर आकर उनसे नहीं मिले। एसएसपी आफिस भी गईं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। दो दिन पूर्व एसपी सिटी डॉ. मनीष मिश्र से मिलीं। साइबर सेल प्रभारी उनके दफ्तर आए, लेकिन इतने दिन में की गई जांच के बारे में कुछ भी नहीं बता पाए। पति चल नहीं सकते और मैं भी छड़ी के सहारे हूं। कुछ दिन पहले पढ़ा था कि पुलिस की मदद हम तक जल्द पहुंचेगी और मधुर रिश्ते बनेंगे। बुजुर्ग महिला के लिए पुलिस का एक इंस्पेक्टर उनके लिए अपने दफ्तर से नीचे नहीं आ सकता। क्या इसी तरह से हमारी जिदगी में सवेरा लाएगी पुलिस?

- प्रेमलता गर्ग, पीड़िता। इस घटना को लेकर खेद व्यक्त करता हूं। मैं खुद इस मामले को देखूंगा। पीड़िता द्वारा पहली शिकायत देने से लेकर हर दिन की कार्यवाही की संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लूंगा। ठगी के साथ उन्हें इस तरह के हुए बर्ताव की भी जांच मैं खुद करूंगा। दोषी के खिलाफ हर हालत में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

- सुधीर कुमार सिंह, एसएसपी।

Posted By: Jagran

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