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ई-वे बिल में खेल: गाजियाबाद में करोड़ों की कर चोरी का पर्दाफाश

Published: Wed, 21 Oct 2026 03:33 PM (IST)

जालसाज ई-वे बिल में हेरफेर कर बड़े पैमाने पर कर चोरी कर रहे हैं, जिसका खुलासा राज्यकर विभाग की जांच ...और पढ़ें

गाजियाबाद में करोड़ों की कर चोरी का पर्दाफाश  ( एआई जेनरेटेड इमेज )

गाजियाबाद में करोड़ों की कर चोरी का पर्दाफाश ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. ई-वे बिल में हेरफेर कर हो रही कर चोरी।

  2. लीथियम बैटरी पार्ट्स फर्मों पर करोड़ों की धोखाधड़ी।

  3. राज्यकर विभाग ने फर्जी बिक्री का किया खुलासा।

शोभित शर्मा, साहिबाबाद। माल भेजने के लिए ई-वे बिल जेनरेट करने में जालसाज खूब खेल कर रहे हैं। कर चोरी के लिए बिल में छेड़छाड़ की जा रही है।

ऐसे कई मामलों में ई-वे बिल के आधार पर राज्यकर विभाग ने कार्रवाई कर टैक्स चोरी का खुलासा भी किया है। अधिकारियों का दावा है कि पोर्टल पर ई-वे बिल कैंसिल होने और इसकी अवधि बढ़ाए जाने समेत अन्य बिंदुओं की निगरानी कराई जा रही है।

46 ई-वे बिल किए कैंसिल

पिछले दिनों राज्य कर विभाग से जोन-1 की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) ने लीथियम बैटरी के पार्ट्स की बिक्री करने वाली दो फर्मों पर जांच की थी। इसमें जांच का आधार पोर्टल पर ई-वे बिल ही बने। दोनों फर्म ने सालभर में करीब 46 ई-वे बिल कैंसिल किए।

इनकी कीमत सात करोड़ से अधिक थी। इसके अलावा 83 लाख के 12 ई-वे बिल की अवधि भी फर्म में बढ़ाई गई। इनकी निगरानी को जब आगे बढ़ाया गया, तो करीब 15 करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का पर्दाफाश हुआ।

अधिकारी हुए बेनकाब 

यह इकलौता मामला नहीं है, जब पोर्टल पर जेनरेट किए बिल का गलत इस्तेमाल किया गया हो। जोन-2 की एसआइबी ने एक मामले में जब ई-वे बिल की जांच की तो पता चला कि एक भी वाहन निर्धारित रूट से गुजरा ही नहीं।

टोल पर किसी वाहन का मूवमेंट अधिकारियों को नहीं मिला। ऐसे में फर्जी बिक्री कर आइटीसी का लाभ लेने की साजिश को अधिकारियों ने बेनकाव किया।


जीसीटी पोर्टल पर इस तरह की फर्म को हाइरिस्क कैटेगिरी में रखा जाता है। एक ही गड़बड़ के बाद इनकी गोपनीय जांच कराई जाती है। बाद में पुख्ता जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की जाती है। ई-वे बिल पर निगरानी के लिए विशेष निर्देश दिए हैं।- मोनू त्रिपाठी, एडिशनल कमिश्नर

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