गाजियाबाद का सीवर जल शोधन प्लांट बनेगा जल संरक्षण का नया मॉडल, सीएम योगी करेंगे टीटीआरओ प्लांट का दौरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद के टर्शरी ट्रीटमेंट रिवर्स आस्मोसिस (टीटीआरओ) प्लांट का दौरा करेंगे, जो सीवर के पानी को शोधित कर औद्योगिक इकाइयों को आपूर्ति करता है।
HighLights
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे टीटीआरओ प्लांट का दौरा।
सीवर के पानी को शोधित कर औद्योगिक इकाइयों को आपूर्ति।
प्रतिदिन 1.5 करोड़ लीटर पानी बचाकर जल संरक्षण।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दौरा करने के लिए टर्शरी ट्रीटमेंट रिवर्स आस्मोसिस (टीटीआरओ) प्लांट को चुना है। गाजियाबाद जिले के ज्यादातर लोग इस प्लांट के बारे में कम ही जानते हैं।
लोगों के मन में एक सवाल है कि आखिर मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को दौरा करने के लिए क्यों चुना? इसका जवाब ये है कि जीवन के लिए सबसे अहम पानी बचाने की योजनाओं को प्रदेश सरकार ज्यादा महत्व दे रही है। आने वाले समय में यूपी एनसआर में मंडरा रहे भूगर्भ जल के संकट को दूर किया जा रहा है।
पानी को बचाया जा रहा
करीब 319 करोड़ रुपये की टीटीआरओ परियोजना से सीवर के पानी को शोधित कर पीने योग्य बनाया जा रहा है। इससे प्रतिदिन 1.5 करोड़ लीटर पानी औद्योगिक इकाइयों को आपूर्ति कर पानी को बचाया जा रहा। इस पानी से शहर की सड़कों का छिड़काव भी किया जाता है।
एक समय था कि लोग कल्पना करते थे कि क्या सीवर के पानी को दोबारा से इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इस कल्पना को नगर निगम ने जमीन पर उतारा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के गिने-चुने शहरों में है।
शुद्ध कर पीने योग्य बनाया
40 एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट में सीवर के पानी को कई चरणों में शुद्ध कर पीने योग्य बनाया जा रहा है। हालांकि, अभी लोग इसे पीने में इस्तेमाल नहीं कर रहे है।
यह पानी केवल साहिबाबाद 1200 औद्योगिक इकाइयों को दिया जा रहा है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनवरी 2022 में परियोजना का शिलान्यास किया था। वर्ष 2025 में संयंत्र से औद्योगिक इकाइयों को शोधित पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी।
रोज 4 करोड़ लीटर पानी शोधित करने की क्षमता
इंदिरापुरम स्थित 56 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी को टीटीआरओ संयंत्र में और अधिक शुद्ध किया जाता है। इसकी डिजाइन क्षमता 40 एमएलडी यानी चार करोड़ लीटर प्रतिदिन है।
इस संयंत्र में अल्ट्रा फिल्ट्रेशन और रिवर्स आस्मोसिस जैसी झिल्ली आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनके माध्यम से पानी में मौजूद बारीक अशुद्धियों और घुले हुए पदार्थों को हटाकर उसकी गुणवत्ता औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप बनाई जाती है।
