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बदमाशों से ज्यादा कुत्तों का खौफ, गाजियाबाद में 1.18 लाख लोगों को कुत्तों ने काटा; डॉग बाइट केस 37% बढ़े 

Published: Mon, 28 Sep 2026 10:18 AM (IST)

गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है, जहाँ जनवरी से अगस्त 2026 तक 1.18 लाख से अधिक लोगों ...और पढ़ें

गाजियाबाद में कुत्तों के काटन के केस 37 प्रतिशत बढ़े। फोटो: आर्काइव

गाजियाबाद में कुत्तों के काटन के केस 37 प्रतिशत बढ़े। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. गाजियाबाद में आठ माह में 1.18 लाख से अधिक डाग बाइट के मामले

  2. पिछले साल की तुलना में डाग बाइट के मामलों में 37% की वृद्धि

  3. एंटी-रैबीज वैक्सीन की उपलब्धता और रैबीज से मौतें चिंताजनक

मदन पांचाल, गाजियाबाद। शहर और देहात में लोगों को बदमाशों से ज्यादा अब आवारा कुत्तों का डर सताने लगा है। गलियों, बाजारों और सड़कों पर घूम रहे कुत्तों के झुंड लोगों के लिए परेशानी बनते जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता बता रहे हैं। जिले में जनवरी से अगस्त 2026 तक 1,18,795 लोगों को कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए हैं। यानी औसतन हर दिन करीब 487 लोग डॉग बाइट के बाद अस्पताल पहुंचे।

अगस्त तक 1.18 लाख डॉग बाइट

आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में 14,428, फरवरी में 16,724 और मार्च में सर्वाधिक 18,913 डॉग बाइट के मामले सामने आए। अप्रैल में 15,846, मई में 15,306, जून में 15,932, जुलाई में 11,052 और अगस्त में 10,594 मामले दर्ज किए गए। इससे साफ है कि गर्मी के महीनों में भी कुत्तों के हमले की समस्या कम नहीं हुई।

चार साल में तेजी से बढ़े मामले

स्वास्थ्य विभाग के चार साल के आंकड़ों में डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2023 में पूरे जिले में 71,570 मामले दर्ज हुए थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,06,532 और 2025 में 1,38,557 पहुंच गई।

वहीं 2026 के पहले आठ महीनों में ही 1.18 लाख से अधिक लोग कुत्तों के काटने पर उपचार के लिए पहुंचे हैं। पिछले वर्ष जनवरी से अगस्त तक 87 हजार से अधिक मामले थे, जबकि इस वर्ष इसी अवधि में संख्या करीब 37 प्रतिशत अधिक है।

एआरवी की उपलब्धता भी चुनौती

बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है। एआरवी की आपूर्ति प्रभावित होने पर अस्पतालों को लोकल परचेज के माध्यम से वैक्सीन की वायल खरीदनी पड़ रही हैं, ताकि कुत्ते के काटने वाले मरीजों को उपचार के लिए इंतजार न करना पड़े।

जिला सर्विलांस अधिकारी डाक्टर आरके गुप्ता का कहना है कि गंभीर घाव वाले मरीजों में चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार एंटी रैबीज सीरम भी लगाया जाता है।

जिले में हर महीने 50 से अधिक गंभीर रूप से घायल लोगों को सीरम लगाने की जरूरत पड़ रही है। जिले में रैबीज से तीन साल में पांच लोगों की मौत भी हो चुकी है।

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