जागरण संवाददाता, फीरोजाबाद: शुक्रवार को मंडलायुक्त ने एक बार फिर जिले का गोपनीय रूप से निरीक्षण कर सरकारी महकमे में खलबली मचा दी। भरी दुपहरी अंगोछे से मुंह ढककर उन्होंने कलक्ट्रेट, विकास भवन और एआरटीओ कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां मौजूद फरियादियों से बात की और कर्मचारियों से अधिकारियों की लोकेशन भी पूछी। एआरटीओ कार्यालय में किलेबंदी पर हैरानी जताई।

मंडलायुक्त के राममोहन राव शुक्रवार की दोपहर जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अपनी गाड़ी कलक्ट्रेट से कुछ दूरी पर छोड़ दी। इसके बाद सिर पर अंगोछा बांध लिया और बाइक से कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां डीएम कार्यालय के बाहर तक गए। वहां मौजूद कर्मचारी कुंदन से पूछा डीएम हैं। कर्मचारी ने बताया कि वह 11 बजे के बाद तक बैठी थीं, इसके बाद कहीं निरीक्षण करने निकल गईं। कमिश्नर ने डीएम के कार्यालय में बैठने का समय भी पूछा। इसके बाद डीएम कोर्ट के बाहर से होते हुए एडीएम कार्यालय को बाहर से देखा, फिर एडीएम न्यायिक के कार्यालय में घुस गए। इस दौरान एक दो कर्मचारियों को छोड़ अन्य कोई उन्हें पहचान नहीं सका।

एक सामान्य आदमी की तरह पैदल घूमते हुए वह कलक्ट्रेट के कई कार्यालयों के सामने से गुजरते हुए कक्ष संख्या 15 तक गए। वहां से वापस लौटे तो विकास भवन चले गए। यहां सीडीओ कार्यालय देखा। सीडीओ नेहा जैन इस समय शहर के कार्यालयों का निरीक्षण कर रही थीं। विकास भवन में कुछ देर चहलकदमी करने के बाद वह बाहर निकल गए। बाइक पर बैठे और सीधे एआरटीओ कार्यालय पहुंचे। वहां काफी भीड़ जमा थी। कार्यालय के अंदर हर किसी के अंदर आने जाने पर पाबंदी थी, लेकिन मीडियाकर्मियों के साथ होने के कारण देहाती से दिख रहे कमिश्नर भी अंदर दाखिल हो गए।

यहां उन्होंने विभिन्न कक्षों का निरीक्षण किया और शौचालय भी देखे। इस दौरान कार्यालय में किसी को कमिश्नर के आने का पता नहीं चल सका। एआरटीओ प्रशासन नीतू ¨सह भी कार्यालय में अपना काम निपटाती रहीं, लेकिन जब मीडियाकर्मियों ने फोटो खींचे तो सीसीटीवी कैमरे के जरिए उन्हें कुछ लोगों के कार्यालय में आने की जानकारी हुई। वे बाहर निकलकर आईं और मीडियाकर्मियों से फोटो के संबंध में जानकारी ली, तब उन्हें कमिश्नर के आने का पता चला।

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किसी को नहीं दिया परिचय

कमिश्नर करीब एक घंटे तक जिले में रहे और कई कार्यालयों का हाल देखा, लेकिन किसी को अपना परिचय नहीं दिया। चेक की हाफ शर्ट और सफेद रंग की कैप लगाने के साथ कमिश्नर ने अंगोछा भी ले रखा था। विकास भवन स्थित समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में गए। उनकी कुर्सी खाली देख कमिश्नर ने कर्मचारियों से उनकी लोकेशन पूछी तो कर्मचारी ने क्षेत्र में होने की जानकारी दी। इसके बाद वह दरवाजे से ही लौट गए।

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अरे तुम्हारे यहां भी आए क्या

कमिश्नर के निरीक्षण की खबर मिलते ही अधिकारी व कर्मचारियों में खलबली मच गई। सभी एक दूसरे से एक ही सवाल पूछ रहे थे कि तुम्हारे यहां भी आए थे क्या.। क्या देखा . क्या पूछ रहे थे .?

Posted By: Jagran

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