फीरोजाबाद, जागरण संवाददाता। मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के जरिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। कंपनी द्वारा चयनित 117 अभ्यर्थियों को कॉलेज प्रशासन ने ये कहते हुए लौटा दिया है कि साक्षात्कार उनकी कमेटी लेगी।

कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी पदों पर 117 कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी है। शासन ने लखनऊ की आउटसोर्सिंग कंपनी 'ए स्क्वायर' को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी। कंपनी ने सभी 117 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए। करीब एक माह पहले ये अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र लेकर आए तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन का माथा ठनक गया। उन्हें ज्वाइन नहीं कराया। शुक्रवार को कंपनी के मैनेजर विशाल राजपूत इस मामले में डॉ. संगीता अनेजा से मिले। प्राचार्य ने ज्वाइनिंग कराने से इन्कार कर दिया। आवेदन फीस के नाम पर करोड़ों कमाए: मेडिकल कॉलेज में स्वीपर, नर्सिंग और क्लर्क स्टाफ की अस्थाई नियुक्ति के लिए ठेका लेने वाली कंपनी आवेदन फीस के नाम पर करोड़ों कमा गई। एक आवेदन पर पांच सौ से एक हजार रुपये तक फीस वसूली गई। चर्चा है कि भविष्य में स्थायी नौकरी का झांसा देकर भी अभ्यर्थियों से वसूली की गई। - किराए के कमरे में हुए साक्षात्कार..एक अभ्यर्थी ने बताया कि कंपनी की ओर कॉल के बाद जब साक्षात्कार देने पहुंचे तो वहां कोई दफ्तर नहीं था, बल्कि एक किराए के कमरे में साक्षात्कार हो रहे थे। खुल्लमखुल्ला डीलिग चल रही थी।

कंपनी ने अपने स्तर से ही नियुक्ति पत्र बांटकर शर्तों का उल्लंघन किया है। पदों के सापेक्ष तीन गुना आवेदकों सूची मेडिकल प्रशासन को दी जानी थी। प्रशासन समिति साक्षात्कार लेती। कंपनी द्वारा नियुक्त स्टाफ को ज्वाइन नहीं कराया जाएगा।

डॉ. संगीता अनेजा, प्रिसिपल

Posted By: Jagran

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