फीरोजाबाद, जासं, मौसम की मार से गेहूं, आलू और सरसों की हजारों हैक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है, लेकिन किसानों से लाखों रुपये का प्रीमियम लेने वाली बीमा कंपनी अब तक सर्वे नहीं कर पाई है। कंपनी जिले में चंद कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। नुकसान के आंकलन की रफ्तार इतनी धीमी है कि सर्वे पूरा करने में कई महीने लग जाएंगे। मंगलवार की शाम हुई समीक्षा बैठक में इस लापरवाही पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए कंपनी के प्रतिनिधियों को फटकार लगाई।

खुले आसमान के नीचे अपने पसीने की फसल उगाने वाले किसानों पर कुदरत की मार का असर कम हो इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई है। सभी किसानों को पूरे साल प्रेरित किया गया कि वे अपनी फसल का बीमा कराएं। सैंकड़ों किसानों ने कराया भी। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने हजारों किसानों के फसल बीमा का प्रीमियम बैंकों ने काटने के बाद ही लोन जारी किया। जिले में 18 हजार से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया है। पांच और 14 मार्च की रात हुई बारिश और ओलावृष्टि से प्रशासन की प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले के 12 हजार 170 किसानों की फसल मौसम की मार से प्रभावित हुई है, लेकिन बीमा कंपनी अब तक चंद गांवों का भी सर्वे नहीं कर पाई है।

मंगलवार की शाम डीएम चंद्र विजय सिंह ने कैंप कार्यालय में फसल बीमा के कार्यों की मूल्यांकन कमेटी की बैठक की। इसमें बीमा कंपनी के लापरवाही सामने आने पर डीएम ने कंपनी के प्रतिनिधियों को कड़ी फटकार लगाई। यहां तक कहा कि जल्द सर्वे कर किसानों को क्षतिपूर्ति न दी गई तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भिजवाया जाएगा। उन्होंने कंपनी के स्टेट हैड को भी तलब किया है। बैठक में सीडीओ नेहा जैन, उप निदेशक कृषि हंसराज, जिला कृषि अधिकारी रविकांत सिंह, लीड बैंक प्रबंधक एसके खंडेलवाल मौजूद रहे।

-ये है नुकसान का हाल:

-11,903 हैक्टेयर फसल हुई है बारिश से प्रभावित

-3525 हैक्टेयर फसल को हुआ है 33 फीसद से अधिक नुकसान

-4.47 करोड़ रुपये के मुआवजे की भेजी गई है डिमांड -ये है बीमा का हाल:

-18077 किसानों ने कराया है फसल बीमा

-1534 किसानों ने किए हैं दावे

-524 दावों का अब तक हो सका है सत्यापन

-किसानों की बात:

पांच बीघा खेत में खड़ी सरसों की फसल बारिश और ओलों की मार से पूरी बर्बाद हो गई है। साधन सहकारी समिति फाजिलपुर जरैला से खाद लेते समय बीमा कराया था। अभी तक कोई सर्वे करने के लिए नहीं आया।

-यादराम सिंह, गांव जरैला

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-पांच बीघा आलू खोदाई के बाद तीन दिन तक बारिश के कारण खेत में पड़ा रहने से सड़ गया। तीन बीघा सरसों की फसल को भी नुकसान हुआ है। फसलों का बीमा कराया था, कंपनी को क्षतिपूर्ति देनी चाहिए।

विजेंद्र सिंह, बलीपुर तपस्या

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-बोरों में भरा आलू बारिश के कारण कई दिन खेत से बाहर नहीं निकाल पाया। इससे बड़ी मात्रा में आलू सड़ गया। सहकारी समिति से खाद लेते समय बीमा कराया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

गजेंद्र पाल सिंह, बलीपुर

-आठ बीघा सरसों और 10 बीघा गेहूं की फसल खेत में गिर कर आधी सड़ गई। इसका प्रधानमंत्री फसल बीमा भी कराया था, लेकिन इतने नुकसान के बाद भी बीमा कंपनी का कोई कर्मचारी नहीं आया।

राजीव राघव, अगौधा

Posted By: Jagran

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