जागरण संवाददाता, फीरोजाबाद: थाने में गुमशुदगी देने के बाद पता नहीं लगा तो बेटियां मां को मरा समझकर आंसू बहा चुकी थीं। रेलवे स्टेशन पर मिली अनजान बेहोश महिला में उम्मीदें देख डॉक्टर ने अपना फर्ज निभाना शुरू किया तो ईमानदारी पर ईश्वर भी मेहरबान हो गया। 15 दिनों के इलाज के बाद महिला को होश आया और पहचान बात दी। मां को जिदा देख बेटियां डॉक्टर को भगवान बता रही हैं।

14 जुलाई को शिकोहाबाद के रेलवे स्टेशन पर एक लकवाग्रसित महिला अचेत अवस्था में पड़ी थी। पहचान सिर्फ इतनी थी कि सीधे हाथ पर मायावती यादव पत्नी अजब सिंह लिखा हुआ था। थाने की होमगार्ड संतोषी ने उन्हें जिला संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया। हालत में सुधार नहीं हुआ तो 16 जुलाई को उन्हें मेडिकल कॉलेज की आइसीयू में भर्ती किया। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उपचार करने में हाथ खड़े कर दिए। 17 जुलाई को समाजसेवी निर्भय गुप्ता ने महिला को प्राइवेट ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया। न्यूरो सर्जन डॉ. निमित गुप्ता ने निश्शुल्क इलाज करने की जिम्मेदारी ली। 14 दिन के उपचार में महिला की तबियत में सुधार हुआ। वह इशारों के माध्यम से बात करने एवं समझने लगीं। बुधवार को निर्भय गुप्ता मायावती को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी ले गए। आस-पास के लोगों ने देखा तो उनकी पुत्री को सूचना दी। सभी लोग अचंभित रह गए। डॉ. गुप्ता कहते हैं कि हमने तो अपना फर्ज निभाया है,बाकी ईश्वर की कृपा है।

- तीन हैं बेटियां, अकेली थी मां

मायावती की पुत्री संगीता पत्नी जयप्रकाश ने बताया कि पिता की 16 वर्ष पूर्व एवं भाई रजनेश की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। मां दिलेर सिंह के मकान में किराए पर रहती थीं। उन्होंने गांव के व्यक्ति को दो बीघा जमीन बेच दी थी और कहीं चली गईं। मां की खोजबीन की, लेकिन कहीं पता नहीं चल सका। हमने तो समझ लिया था कि मां की मौत हो चुकी है।

Posted By: Jagran

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