संवाद सहयोगी, टूंडला: प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही बेसहारा गोवंश के लिए जानलेवा साबित हो रही है। जिला व ब्लॉक स्तर पर भले ही लाखों रुपये का बजट मौजूद हो, लेकिन अस्थाई गो आश्रय स्थलों में रह रहे पशुओं के लिए कुछ भी नहीं है। गांव जरौली कलां में गुरुवार को आधा दर्जन गोवंश की मौत हो गई। एक दिन पहले नगलाबीच में गोवंश मरे थे।

तहसील से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित गांव जरौली कलां में प्रशासन ने पांच फरवरी को प्राइवेट भूमि पर गोशाला खुलवाई थी। इसमें 150 गोवंश को रखा गया था। गांव के ही भरत सिंह पुत्र अजब सिंह को देखरेख की जिम्मेदारी दी गई। प्रधान सत्यपाल सिंह यादव के अनुसार उन्होंने अपने प्रयासों से कुछ दिन तक तो गोवंश को चारा खिलाया, लेकिन प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। बाद में चारा न मिलने के कारण धीरे-धीरे गोवंश की मौत होती गई। यही वजह है कि अब यहां गोवंश की संख्या घटकर 85 रह गई है। ग्रामीणों की मानें तो अब तक 32 गोवंश की मौत हो चुकी है। गोवंश को चुपचाप दफना दिया जाता है। पशु चिकित्सा अधिकारी को हटाया:

गोवंश की मौत पर ग्रामीणों ने हंगामा किया। मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो पहले बीडीओ फीरोजाबाद प्रभात मिश्रा और फिर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. प्रभंजन शुक्ला अपनी टीम के साथ गोशाला पहुंचे। सीवीओ ने लापरवाही में क्षेत्र पशु चिकित्सक डॉ. सरनाम सिंह को हटा दिया, उनकी जगह मटसेना के डॉ. राजकुमार को भेजा गया है। सीवीओ का कहना है कि एक गाय की मौत हुई है। आरोप गलत हैं। हम दो महीने से गोवंश के लिए उधार में भूसा और चारा ला रहे हैं। अभी तक एक रुपया नहीं मिला है, हालांकि इसके बाद भी भूसा और चारे की कमी नहीं होने दी गई है। कुछ ग्रामीण साजिशन गलत आरोप लगा रहे हैं।

जितेंद्र यादव, ग्राम विकास अधिकारी गोशाला में गोवंश के आहार की पूरी व्यवस्था है। बीमार पशुओं की देखभाल में पशु चिकित्सा अधिकारी ने लापरवाही की है। उसके खिलाफ रिपोर्ट भेजी गई है।

प्रभात मिश्रा, बीडीओ फीरोजाबाद

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