मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण संवाददाता, फीरोजाबाद: वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन में करोड़ों की धनवर्षा हुई तो विभागों ने भी खाते में जमा 48 करोड़ रुपये से अधिक का बजट दो दिन में खर्च कर लिया। बजट मिलने की उम्मीद में कई विभाग रविवार की देर शाम तक खुले रहे। कुछ विभागों ने धनराशि खर्च न हो पाने के कारण करोड़ों रुपये सरेंडर भी किए।

हर विभाग के लेखाकारों की मंजिल एक सप्ताह से कोषागार बना हुआ है। शनिवार को यहां 31.62 करोड़ रुपये के बिल विभिन्न विभागों ने पास कराए। रविवार को भी यहां अफरा तफरी जैसा माहौल रहा। शाम पांच बजे तक 16.66 करोड़ रुपये के बिल जमा हो गए थे। इसके बाद भी बजट खर्च करने के लिए विभागों से बिलों का आना जारी था। रविवार की दोपहर समाज कल्याण विभाग को आश्रम पद्धति विद्यालय पैंढ़त में बिजली बिल के भुगतान के लिए 35 लाख रुपये का बजट मिला। इसे खर्च कर लिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग को एक करोड़, उद्योग को 50 लाख, एनसीसी को 50 लाख, कलक्ट्रेट को 10 लाख रुपये मिले। सबसे अधिक दो करोड़ रुपये पंचायती राज विभाग को मिले।

अंतिम दिन एवं समय पर मिले बजट को खर्च करने के लिए विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी जुटे रहे। रविवार को विकास भवन में समाज कल्याण, डीपीआरओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित कई कार्यालय खुले रहे। वहीं कोषागार में वरिष्ठ अनुपम कुमार श्रीवास्तव सहित सभी लेखाकार बिलों को निपटाने में व्यस्त रहे।

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चार करोड़ से अधिक हुए सरेंडर:

विभिन्न योजनाओं में बजट खर्च न हो पाने के कारण पंचायती राज और कृषि विभाग ने दो दो करोड़ रुपये सरेंडर किए। आपदा विभाग ने करीब 22 लाख रुपये सरेंडर किए हैं। जिला कार्यक्रम विभाग ने भी लाखों रुपये सरेंडर किए। कोषागार का सर्वर रविवार की शाम को पांच बजे ही बंद हो गया था।

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Posted By: Jagran

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