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फिरोजाबाद जेल से अब ऑनलाइन होगी बंदियों की कोर्ट में पेशी, बनेंगे 37 अत्याधुनिक क्यूबिकल केबिन

Published: Tue, 08 Sep 2026 08:50 PM (IST)

फिरोजाबाद जेल में बंदियों की ऑनलाइन पेशी के लिए 37 अत्याधुनिक क्यूबिकल केबिन बनाए जाएंगे।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

HighLights

  1. जेल में 37 ऑनलाइन पेशी क्यूबिकल केबिन बनेंगे।

  2. सुरक्षा जोखिम शून्य होगा, पुलिस बल बचेगा।

  3. न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी, समय की बचत।

जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। जेलों से बंदियों की अदालतों में ऑनलाइन (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से) पेशी कराने के लिए जेल परिसर में 37 अत्याधुनिक क्यूबिकल केबिन बनाई जाएगी। इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य पेशी के दौरान सुरक्षा जोखिम को शून्य करना है। साथ ही पुलिस बल और समय की बचत करना और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाना है।

बंदियों की ऑनलाइन पेशी से सुरक्षा जोखिम होगा। अक्सर अदालत में ले जाने के दौरान हाई-प्रोफाइल बंदियोें, गैंगस्टरों और विरोधी गुटों को कोर्ट ले जाने के दौरान भागने या उन पर हमले होने का खतरा बना रहता है। जेल के भीतर से ही ऑनलाइन पेशी होने पर यह सुरक्षा जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

साथ ही न्याय प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। अक्सर फोर्स की कमी की वजह से बंदियों को अदालत में पेश करने में देरी होती थी। इस योजना के तहत जेलों के भीतर आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से लैस क्यूबिकल केबिन तैयार किए जा रहे हैं। इसमें कंप्यूटर सिस्टम, हाई-स्पीड इंटरनेट, वेब कैमरा और माइक्रोफोन जैसी तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी ताकि बिना किसी रुकावट के अदालती कार्यवाही (वर्चुअल हियरिंग) पूरी हो सके।

जिले में 37 कोर्ट कक्ष हैं। इसलिए 37 केबिन बनाई जाएगी। जेल अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि शासन को सवा करोड़ का इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन की ओर से 11 केबिन के उपकरण भेज दिए गए हैं। दो माह में यह पूरी तरह से सुचारू हो जाएगी। शेष 26 के लिए जल्द ही उपकरण आने की उम्मीद है। उम्मीद है कि आगामी वर्ष से सभी तरह के बंदियों की अदालत में ऑनलाइन पेशी शुरू हो जाएगी।

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वर्तमान में 1344 बंदी जेल में हैं निरुद्ध

  • पुरुष बंदी-- 1292
  • महिला बंदी- 52
  • विदेशी बंदी- 01 महिला


बंदियों की कोर्ट में आनलाइन पेशी के लिए क्यूबिकल केबिन का निर्माण होगा। शासन की ओर से 11 केबिन के लिए उपकरण भेज दिए गए हैं। इस व्यवस्था से बंदियों को अदालत में ले जाने के दौरान सुरक्षा खतरा शून्य हो जाएगा। साथ ही न्याय प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। उम्मीद है कि नए वर्ष में बंदियों की पूरी तरह से ऑनलाइन पेशी की व्यवस्था शुरू हो जाएगी।

                                                                                          अमित चौधरी, जेल अधीक्षक