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आरव की हत्या का वीडियो देख हत्यारा विराज बोला...नशे में हो गई गलती, अदालत में मारा खुद को चांटा

By Digital Desk Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 10 Jul 2026 04:58 PM (IST)

फिरोजाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की निर्मम हत्या के दोषी विराज को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई ...और पढ़ें

कोर्ट के बाहर मीडिया से अपनी  बात कहता विराज और दूसरे फोटो की अदालत की कार्रवाई बताते डीजीसी राजीव प्रियदर्शी।

कोर्ट के बाहर मीडिया से अपनी बात कहता विराज और दूसरे फोटो की अदालत की कार्रवाई बताते डीजीसी राजीव प्रियदर्शी।

जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। 30 मई 2026, शिकोहाबाद की यादव कॉलाेनी में डेढ़ साल के मासूम आरव को गली में आठ बार पटका। जब तक उसकी सांसें नहीं थमी, रिश्ते में लगने वाला चाचा विराज उसे पटकता रहा। टॉफी दिलाने के बहाने वह बच्चे को घर से लाया था। हत्या करने के बाद फरार हो गया। सीसीटीवी फुटेज से वीडियो निकला तो देशभर में छा गया।

जिसने भी वह वीडियो देखा, दुबारा देखने की हिम्मत नहीं कर पाया। हर व्यक्ति के दिल से एक आह निकली...हत्यारे को सजा हो। फिरोजाबाद जनपद न्यायाधीश डा. बब्बू सारंग की कोर्ट में रोंगटे खड़े कर देने वाले इस हत्याकांड में दोषी की सजा पर सबकी निगाहें थीं। दोषी को सजा दिलाने में घटना का इंटरनेट पर वायरल सीसीटीवी फुटेज की अहम भूमिका रही।

फुुटेज में दोषी पटककर मारते हुए और कंधे पर लेकर जाते हुए नजर आया था। इतना ही नहीं कोर्ट में सुनवाई के दौरान घटना सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया तो दोषी ने खुद को थप्पड़ मार लिया था।

शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद दोपहर सवा दो बजे दोषी विराज को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायालय में पेश किया गया। वह पुलिसकर्मियों के घेरे में वाॅकर के सहारे पहुंचा। जहां उसे अदालत ने मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद भी चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। वह हमेशा की तरह गुमसुम बना रहा।

सजा सुनाए के बाद कोर्ट से बाहर निकलने पर मीडिया कर्मियों से बातचीत में बस इतना कहा कि नशे की हालत में घटना हो गई। न्यायालय में निर्णय सुनाए जाने के दौरान आरव की नानी पिंकी शर्मा एवं अन्य स्वजन उपस्थित रहे। वहीं विराज के घर से कोई नहीं आया था। जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि डेढ़ वर्ष के बच्चे की पटककर हत्या में दोषी को मृत्युदंड की सजा हुई है।

सीसीटीवी कैमरे की फुटेज दोषी को सजा दिलाने में अहम साक्ष्य साबित हुआ। उसे मारते हुए और कंधे पर लेकर जाते हुए देखा था। बचाव पक्ष ने दोषी के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की दलील दी, लेकिन जिरह में वह टूट गया था।

न्यायालय ने उसकी बातों पर गौर नहीं किया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब घटना सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया था दोषी ने देखने के बाद खुद को थप्पड़ मार लिया था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसे भी घटना का पछतावा था। यह इतना जघन्य हत्याकांड था कि इसका वीडियो एक बार देखने के बाद कोई दोबारा नहीं देख सकता है।

फिरोजाबाद के मामले की देशभर में गूंज

फिरोजाबाद जनपद की अदालत ने देश के न्यायिक इतिहास में त्वरित न्याय की एक मिसाल पेश की है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग ने घटना के ठीक 41वें दिन फांसी की सजा सुनाई है। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में अब तक सबसे कम समय में सजा के मामलों में यह शामिल हो सकता है।

'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' माना गया मामला

गुरुवार को जब जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग ने दोष सिद्ध करने के बाद आज शुक्रवार को इस ऐतिहासिक फैसले की प्रति पढ़नी शुरू की, तो पूरा कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ था। न्यायाधीश ने इस राक्षसी कृत्य को बच्चों के खिलाफ 'बाल जघन्य अपराध' और 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) मानते हुए आरोपी को मौत की सजा सुनाई।

पुलिस की 'सुपरफास्ट' चार्जशीट और सरकारी वकील की दमदार पैरवी

इस मामले में यूपी पुलिस और अभियोजन पक्ष ने भी मिसाल कायम की। एसएसपी आदित्य लाग्हें और एसपी ग्रामीण अनुज चौधरी के कड़े निर्देशन में शिकोहाबाद थाना प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार ने महज 6 दिनों के भीतर तफ्तीश पूरी कर 13 गवाहों के बयानों के साथ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।

अदालत में डीजीसी राजीव प्रियदर्शी ने बेहद मजबूती से सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने रिकॉर्ड समय में मोहल्ले के 13 चश्मदीदों की गवाही अदालत के सामने कराई और कड़ी से कड़ी कानूनी दलीलें पेश कीं, जिसके आगे बचाव पक्ष टिक नहीं सका।

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