शिकोहाबाद,(फीरोजाबाद) संवाद सहयोगी। सावन माह में नगर की सड़कों पर कांवड़ियों के बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे। सुबह से देर रात तक सड़कों से गुजरते हुए देखे जा सकते हैं। कांवडि़यों के लिए नगरवासियों ने जगह-जगह फल वितरण, जूस पिलाने को कैंप लगाए हैं।

श्रावण में भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु बटेश्वर में कांवड़ चढ़ाने जाते हैं। यह कांवडि़ये कासगंज जिले के सोरों कस्बा से कांवड़ भरकर लाते हैं। वह 100-125 किमी. लंबी पैदल यात्रा करके आगरा जनपद के बटेश्वर में भोले शंकर के मंदिर में पहुंचकर कावंड़ चढ़ाते हैं। बटेश्वर को भोलेनाथ की नगरी कहा जाता है। यहां दिन-रात मेला जैसा लगा रहता है। श्रावण में हजारों कांवडि़ये अपने कंधों पर कांवड़ रखकर बटेश्वर की ओर जाते देखे जा सकते हैं। सोरों से बटेश्वर जाने के लिए एटा रोड, कटरा बाजार, स्टेशन रोड आदि स्थानों गुजरते देखे जा रहे हैं। इसमें कई महिलाएं भी कांवड़ ले जाते हुए नजर आ रही हैं। पुल निर्माण कार्य के चलते कांवडि़यों को एटा चौराहे पर काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन रोड पर नहर का पुल संकरा होने से पुलिस पिकेट लगाई गयी है, जो कांवड़ियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाती है।

सावन के दूसरे सोमवार को शिवालयों में पूजा अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। सुबह पांच बजे से श्रद्धालुओं का रुख नगर के प्रमुख शिवालयों की ओर हो गया। वह हाथों में पूजा की थाली हुए भोलेनाथ के पूजन को घर से निकल पड़े। शिवालयों में सुबह से दोपहर तक पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। महिलाओं, युवतियों ने भोलेनाथ का पूजन कर मन्नतें मांगी। नगर के पथवारी मंदिर, एटा रोड स्थित चौमुखी महादेव मंदिर, रोडवेज बस स्टैंड मंदिर, हीरानगर मंदिर, गंगेश्वर पाठशाला स्थित मंदिर, शंभूनगर स्थित महादेव मंदिर सहित प्रमुख शिवालयों में फूलबंगला सजाए गए।

जसराना में प्रमुख शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक किया। प्राचीन श्री वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में पूजा के लिए सुबह से श्रद्धालुओं की कतार लगीं। मंदिर प्रबंधन ने लाइन लगवाकर पूजन कराया। मंदिर में सुबह आठ बजे से दोपहर तक कतार लगी रही। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस फोर्स भी तैनात रहा। देहात क्षेत्र में भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालुओं ने विधि विधान से पूजन किया। कांवड़ियों के बम बम भोले के जयकारों से सड़कें गूंजती रहीं। नारे भी गुंजायमान हो रहे थे। कस्बा में जगह-जगह कांवडियों को जलपान कराया गया।

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