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हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है फत्तेपुर की रामलीला, 40 सालों से सज रहा सौहार्द का मंच

Published: Mon, 12 Oct 2026 04:40 PM (IST)

मौदहा के फत्तेपुर में 40 वर्षों से आयोजित हो रही ऐतिहासिक रामलीला हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है।

ये तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है।

ये तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. फत्तेपुर में 40 साल से हिंदू-मुस्लिम एकता की रामलीला।

  2. मौदहा में दोनों समुदायों के सहयोग से होता है आयोजन।

  3. सरकारी मदद के बिना आपसी चंदे से चलता है मंचन।

जागरण संवाददाता, फतेहपुर। सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश करते हुए मौदहा कस्बे के फत्तेपुर मोहल्ले में इस वर्ष भी दीपावली के बाद चतुर्थी तिथि से ऐतिहासिक रामलीला का भव्य आयोजन होगा।

पिछले 40 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही यह रामलीला हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की साझा आस्था और आपसी भाईचारे का प्रतीक बनी हुई है। बाबा विश्वनाथ शिव मंदिर रामलीला मंच पर आयोजित होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान की तैयारियां कमेटी के सदस्यों द्वारा जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं।

इस अनूठी परंपरा की शुरुआत करीब चार दशक पूर्व हिंदू समाज के दयाशंकर गोस्वामी व रामकिशोर यादव और मुस्लिम समाज के अब्दुल जमील उर्फ बबलू लंबरदार ने मिलकर की थी। उन्होंने आपसी एकता का संदेश देने के उद्देश्य से इस मंचन की नींव रखी थी, जिसे आज भी दोनों समुदाय पूरी शिद्दत और समर्पण के साथ निभा रहे हैं।

यह आयोजन किसी सरकारी मदद के बिना कमेटी सदस्यों, वार्ड वासियों और अपनी पैतृक भूमि पर आपसी सहयोग व चंदे से आयोजित किया जाता है।

इस वर्ष दीपावली के बाद आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के संरक्षक प्रमोद गोस्वामी, अध्यक्ष शमसुल हक, कोषाध्यक्ष रामकिशोर यादव के साथ-साथ दुर्गेश यादव, अब्दुल मुकीम, अवधेश गोस्वामी, अब्दुल हलीम उर्फ राजू अशोक सहित अन्य सभी सदस्य पूरी निष्ठा से जुटे हुए हैं। इस रामलीला में पात्रों के चयन में भी विविधता देखने को भी मिलती है।

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कमेटी के लोगों की बात-

हमारे पूर्वजों द्वारा बोया गया भाईचारे का यह पौधा आज एक वटवृक्ष बन चुका है। हमारे पिता और हिंदू समाज के प्रबुद्धजनों ने जिस रामलीला की नींव रखी थी, उसे हम आज भी बिना किसी भेदभाव के मिलकर आयोजित करते हैं।
- शमसुल हक, अध्यक्ष रामलीला समिति, मौदहा।

शुरुआती दौर में जब हमने 40 वर्ष पहले रामलीला शुरू की थी, तब पूरा कार्यक्रम 10 से 15 हजार रुपये के सीमित बजट में संपन्न हो जाता था। अब समय के साथ बढ़ती महंगाई के कारण इस भव्य मंचन पर लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च आता है।
- रामकिशोर यादव, कोषाध्यक्ष रामलीला समिति, मौदहा।