फतेहपुर में भरभराकर गिरी बरामदे की कच्ची छत, महिला की दबकर मौत
फतेहपुर के चिल्ली गांव में बरामदे की कच्ची छत ढहने से झाड़ू लगा रही 55 वर्षीय विषमा देवी की मलबे में दबकर मौत हो गई।

दिवंगत महिला के पर जुटी स्वजन व ग्रामीणों की भीड़ मौके पर मौजूद विधायक राजेंद्र सिंह पटेल
HighLights
फतेहपुर के चिल्ली गांव में कच्ची छत ढहने से हादसा।
झाड़ू लगा रही 55 वर्षीय महिला विषमा देवी की मौत।
विधायक और तहसीलदार ने पीड़ित परिवार को मदद का आश्वासन दिया।
संवाद सूत्र, फतेहपुर। जहानाबाद थाना क्षेत्र के चिल्ली गांव में बरामदे की कच्ची छत ढहने से झाड़ू लगा रही 55 वर्षीय महिला विषमा देवी मलबे में दब गईं। छत गिरने की आवाज सुनकर स्वजन व पड़ोसी दौड़कर पहुंचे और मलबा हटाकर महिला को बाहर निकला। इसके बाद गंभीर हालत में निजी अस्पताल ले गए। जहां पर चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
चिल्ली गांव निवासी राम बहादुर उत्तम के मकान के बगल में भतीजे विनोद कुमार का मकान बंद पड़ा है। मकान से जुड़ा एक बरामदा, उस बरामदे में वह मवेशी (बकरियां) बांधते हैं। शुक्रवार की सुबह तेज वर्षा बंद होने के बाद उनकी 55 वर्षीय पत्नी विषमा देवी बरामदे में झाड़ू लगाकर सफाई कर रही थीं।
इस दौरान करीब सात बजे बरामदे की कच्ची छत मिट्टी और धन्नी सहित नीचे गिरी। छत के मलबे में महिला मलबे में दब गई। छत गिरने से हुई आवाज सुनकर स्वजन व पड़ोसी दौड़कर पहुंचे। मलबा हटाकर महिला को आधे घंटे में बाहर निकला लिया।
हालत गंभीर होने के कारण इलाज के लिए कस्बा जहानाबाद के एक निजी अस्पताल ले लाए। यहां चिकित्सक ने महिला को मृत घोषित कर दिया। थाना प्रभारी योगेश कुमार ने बताया कि महिला की मौत हुई है। घटना की सूचना पर जहानाबाद विधायक राजेंद्र सिंह पटेल, नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे। परिवार से मिलकर उन्हें आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया।
दस वर्ष पहले दिवंगत के इकलौते पुत्र की हो चुकी है मौत
दिवंगत महिला विषमा देवी के लिए इकलौते पुत्र राजू की दस वर्ष पूर्व कैंसर की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। दिवंगत के तीन पुत्रियां हैं। बड़ी पुत्री निशा उत्तम, मंजुला उत्तम की शादी हो चुकी है। निशा उत्तम माता पिता के साथ मायके में ही रहती है दिवंगत की छोटी रुची उत्तम अविवाहित है।
बकरियों की बच गई जान
जिस बरामदे की छत ढहने से महिला की मौत हो गई। उसकी बरामदे के अंदर एक पुराना ई-रिक्शा खड़ा था। बकरियां उसकी ई-रिक्शा के नीचे बैठीं थी। इस कारण कोठरी ढहने से मलबा सीधे बकरियों के ऊपर नहीं गिरा। इस कारण सभी की जान बच गई।
