फतेहपुर में 29 साल बाद इंसाफ; सिपाही की हत्या करने वाले दस्यु गिरोह के 3 डकैतों को उम्रकैद, 8 पुलिसकर्मी हुए थे घायल
फतेहपुर में 29 साल पुराने सिपाही हत्याकांड में दस्यु गिरोह के तीन सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ...और पढ़ें

पुलिस अभिरक्षा में दोषी सीताराम, राधेश्याम व छोटा। जागरण
HighLights
29 साल पुराने सिपाही हत्याकांड में आया फैसला।
दस्यु राधेश्याम, सीताराम और छोटा को उम्रकैद।
1997 में पुलिस मुठभेड़ में सिपाही राम सेवक शहीद।
जागरण संवाददाता, फतेहपुर। 21 अक्टूबर 1997 को गुंडा एक्ट के वारंटी को पकड़ कर ले जा रही असोथर पुलिस पर दस्यु गिरोह ने हमला बोल दिया था। डकैतों व पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में प्रयागराज जिले के होलागढ़ थानाक्षेत्र के मालापुर निवासी कांस्टेबल राम सेवक की मौत हो गयी थी। जबकि ट्रैक्टर चालक समेत आठ पुलिस कर्मी घायल हो गये थे। इस मामले में शनिवार को फैसला आया।
शनिवार को एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश डा. मोहम्मद इलियाश ने मामले की अंतिम सुनवाई की। सबूत और सक्ष्य के आधार पर सूचीबद्ध दस्यु राधेश्यम मौर्य और सीताराम मौर्य (सगे भाई) व इनके पुरइन गांव निवासी साथी छोटा का उम्र कैद की सजा सुनाई। तीनों पर 32-32 हजार का जुर्माना लगाया। तीनों डकैत 2016 में प्रयागराज की एसटीएफ से हुई मुठभेड़ में गिरफ्तार हुए थे और वर्तमान में जेल में हैं।
29 साल पहले सातों-धरपुर मजरे शिवबोधन का डेरा निवासी गुंडाएक्ट के आरोपित को पुलिस टीम गिरफ्तार करने गयी थी। वारंटी की गिरफ्तारी कर पुलिस लौट रही थी कि टीकर गांव के समीप झांडियों में सीताराम-राधेश्याम का गैंग छिपा था। गैंग को लगा कि उनकी मुखबिरी हो गयी है और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आ रही है। ऐसे में गैंग के सदस्यों ने गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने कुछ देर मोर्चा लिया, लेकिन पुलिस दल की तरफ से कांस्टेबल की मौत होने और अन्य के घायल होने का फायदा उठाकर गैंग भाग निकला।
थानाध्यक्ष श्याम नारायण सरोज ने पुलिस मुठभेड़ का मुकदमा गैंग पर दर्ज किया। पुलिस की तरफ से मुठभेड़ में असोथर थानाध्यक्ष श्याम नारायण सरोज, कांस्टेबल राम प्रकाश, सदाशिव, अनिरूद्ध, हरीश कुमार, राजवीर सिंह, शोभनाथ सिंह तथा वारंटी अभियुक्त फूलसिंह उर्फ खुन्नी घायल हुए थे, जबकि कांस्टेबल राम सेवक की मौत हुई थी।
पुलिस ने इस घटना में गैंग संचालक ओरम्हा निवासी सीताराम व राधेश्याम, गैंग सदस्य पुरइन निवासी छोटा, रामसिंह, छीमी गांव निवासी रमेश नोनिहा, फूल सिंह व धर्म सिंह, मुन्ना का पुरवा निवासी भूरा और रामराज को नामित व पांच-छह अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
इस दौरान विवेचना में पाया गया कि इस घटना में शामिल होने का दावा राम सिंह, रमेश नोनिहा, फूल सिंह, धर्म सिंह, भूरा और रामराज के लिए किया गया है लेकिन वह घटना के समय अन्य मुकदमों में जेल में थे। ऐसे इन्हें विवेचना दौरान एफआर लगाकर बाहर कर दिया गया। सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम ने सजा दिलाने के लिए मजबूत दलीलें रखी।
मृत होने का 2016 में खुला भेद, गये जेल
सीताराम व राधेश्याम गैंग का नाम पुलिस रिकार्ड में डी-1 गैंग के रूप में दर्ज है, लेकिन 1997 में पुलिस मुठभेड़ के बाद यह गैंग भूमिगत हो गया। लंबे समय तक कोई सुराग व गतिविधि न होने के कारण इन्हें गांव से समाज तक में मृत माना गया। यहां तक की पुलिस भी इन्हें मृतक मान रही थी लेकिन लिखा पढ़ी में मृत नहीं माना गया। 2016 में जब इस गैंग ने एसटीएफ प्रयागराज के साथ मुठभेड़ में पहले राधेश्याम गिरफ्तार हुआ और फिर एसटीएफ ने सीताराम को भी खोज लिया और जेल भेज दिया।
