Fatehpur Blast: सिलिंडर नहीं... बारूद या कार्बाइड से उड़ा मकान; 200 मीटर दूर तक गिरीं ईंटें और सोलर पैनल
फतेहपुर के मलवां में सुरेश गुप्ता के घर हुए विस्फोट में पांच लोगों की मौत के 24 घंटे बाद भी ...और पढ़ें

HighLights
ईंटों के टुकड़े 200 मीटर तक फैले, छतों पर लगे सोलर पैनल उखड़कर दूर गिरे, लोहे के एंगल उखड़े
आसपास बिखरे काले रंग के पत्थर, पटाखों की सामग्री या फल पकाने वाले कार्बाइड के टुकड़े होने की आशंका
एसपी का बारूद से विस्फोट की आशंका से इन्कार, घर में थोड़ी मात्रा में हल्के पटाखे होने का जताया अनुमान
जागरण टीम, फतेहपुर। मलवां में सोमवार को फल व पटाखा व्यापारी सुरेश गुप्ता के घर हुए विस्फोट और पांच लोगों की मौत पर 24 घंटे बाद भी स्थित स्पष्ट नहीं हो सकी है। पेट्रोलियम कंपनी भारत गैस के अधिकारियों ने मंगलवार को घटनास्थल की जांच के बाद एलपीजी सिलिंडर से विस्फोट की बात से इन्कार किया है। वहीं, आसपास काले और कठोर पत्थरनुमा टुकड़े बिखरे हैं। ऐसे में बारूद या कार्बाइड की आशंका जाहिर की जा रही है।
हादसे के दूसरे दिन आसपास के लोग इसे पटाखों में प्रयुक्त किए जाने वाली सामग्री या फल पकाने के काम आने वाले कार्बाइड मान रहे हैं। पास में ही सूखे कुएं में पटाखे भरा झोला मिला है। एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि किचन के पास ही सोलर पैनल की बैटरियां रखीं थीं। सिलिंडर या बैटरी के विस्फोट से भी हादसा हो सकता है।
व्यापारी पटाखे बेचने का काम बंद कर चुके हैं। संभव है कि फुलझड़ी या हल्के पटाखे रखे रहे हों, जो विस्फोट में सहायक बने हों। पटाखे या बारूद से विस्फोट की बात सामने नहीं आई है। घायलों का हाल जानने पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री अजीत पाल ने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। जो भी निष्कर्ष निकलेगा, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
सुरेश गुप्ता के दो मंजिला घर में सोमवार शाम हुआ विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के 10 से 12 मकान इसकी चपेट में आ गए। कहीं दीवारें ढह गईं तो किसी का गेट गिर गया और कहीं छत और कमरों में दरारें पड़ गईं। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ईंटों के टुकड़े पड़ोसी मकानों की दीवारों से इतनी तेजी से टकराए कि उनमें छेद तक हो गए। दूर तक छतों पर ईंटों और मलबे के टुकड़े पड़े हैं।
पश्चिम दिशा में ननकू सिंह के मकान की छत ढह गई। महेश सिंह का कमरा गिर गया, जबकि विजय दत्त द्विवेदी के मकान की चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई। सुरेश सिंह के घर का इज्जतघर भी ढह गया। उत्तर दिशा में बसंत सिंह, दीपक और अरुण द्विवेदी के मकान क्षतिग्रस्त हुए।
पूरब दिशा में अनमोल सिंह और शिवमोहन सिंह के मकानों को भी नुकसान पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शी दीपक द्विवेदी ने बताया कि उनका मकान घटनास्थल से एक मकान और रास्ता छोड़कर है। मईंटों के टुकड़े इतनी तेजी से उनकी ओर आए कि दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने दीवार पर पड़े निशान दिखाते हुए कहा कि घटना पांच मिनट पहले होती तो और लोग गंभीर रूप से घायल हो सकते थे।
महेश सिंह ने कहा कि घरेलू गैस सिलिंडर से होने वाला विस्फोट इतना व्यापक नुकसान नहीं करता। उनके मुताबिक मकान के ऊपर लगा सोलर पैनल भी उखड़ गया। उसका लोहे का एंगल उड़कर भैरव के मकान की पानी की टंकी से जा टकराया। सोलर पैनल का एक टुकड़ा हाईवे किनारे सोहन पेड़ा की दुकान के पीछे गिरने की चर्चा भी है।
बारूद या कार्बेट होने की आशंका
सुरेश गुप्ता के मकान की उत्तर दिशा में सबसे अधिक मलबा गिरा है। यहां एक मकान के सामने खुले मैदान में मलबे के बीच काले रंग के कठोर, पत्थरनुमा टुकड़े बिखरे मिले। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे टुकड़े पटाखों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से जुड़े हो सकते हैं। कुछ लोगों ने यह संभावना भी जताई कि सुरेश गुप्ता फल के बड़े कारोबारी हैं और फल पकाने के लिए कार्बाइड रखा गया हो सकता है। हालांकि इन काले टुकड़ों की वास्तविक प्रकृति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
छुट्टी न हुई होती तो खतरे में पड़ जाती 15 बच्चों की जान
विस्फोट से पांच मिनट पहले प्रियांजली द्विवेदी अपने मकान की छत पर 15 बच्चों को कोचिंग पढ़ा रही थीं। छुट्टी होने के बाद बच्चे अपने-अपने घर चले गए। कुछ ही मिनट बाद हुए धमाके में उसी छत पर ईंटों के बड़े-बड़े टुकड़े आकर गिरे। समय पर बच्चे वहां से नहीं हटे होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। सुरेश गुप्ता के मकान से सटे अनमोल सिंह और शिवमोहन सिंह के मकान में पितृपक्ष का कार्यक्रम प्रस्तावित था। संयोग से कार्यक्रम दूसरे मकान में रखा गया। विस्फोट में उनके तीन कमरों की छत ढह गई। हादसे के समय लोग मौजूद होते तो जनहानि और बढ़ सकती थी। अब मलबे में बिखरे टुकड़े और क्षतिग्रस्त मकान प्रशासन की जांच के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।
एक भरा सिलिंडर मिला
प्रयागराज से भारत गैस के प्लांट मैनेजर वेद प्रकाश वर्मा व सेल्स आफीसर पवन भारतीय टीम के साथ मंगलवार की सुबह 10 बजे घटनास्थल पहुंचे। एक घंटे तक पूरे मलबे के ढेर में सिलिंडर फटने के सबूत तलाशने में लगे रहे। काफी देर बाद रसोई गैस चूल्हा मिला। इसका पाइप व रेग्युलेटर इंडेन गैस का था। घर में तीन सिलिंडर रखे मिले हैं, इसमें एक भरा है।
जांच में सिलिंडर से विस्फोट होने की बात सामने नहीं आई
मलवां भारत गैस एजेंसी के संचालक चंद्रभान यादव ने बताया कि टीम आई थी। जांच में सिलिंडर से विस्फोट होने की बात सामने नहीं आई है, जो गैस चूल्हा, गैस पाइप व रेग्युलेटर मिला है वह इंडेन गैस का है। बताते हैं कि सुरेश के घर में दो गैस कनेक्शन थे। केवाईसी न होने के कारण एक कनेक्शन से गैस नहीं मिल रही थी।
रसोईघर में चूल्हा व रेग्युलेटर मिला है, सिलिंडर नहीं मिला
उधर, एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि दूसरी मंजिल के रसोईघर में चूल्हा व रेग्युलेटर मिला है, सिलिंडर नहीं मिला है। तहसीलदार बिंदकी धीरज त्रिपाठी, पूर्ति विभाग से एआरओ आरती अरोड़ा व पूर्ति निरीक्षक राजेंद्र त्रिपाठी ने भी घटनास्थल का जायजा लिया।
शाम पांच बजे सब ठीक था, तभी हुआ विस्फोट
सुरेश दीपावली पर पटाखे की दुकान लगाते थे। पत्नी उमा ने बताया था कि सोमवार शाम करीब पांच बजे खाना बनाते समय गैस चूल्हे के पाइप में आग लग गई। वह बाहर भागीं तो कुछ देर बाद तेज विस्फोट हुआ। उनके दो मंजिला घर का पहला तल पूरी तरह गिर गया, भूतल की छत व दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं। सुरेश के 18 वर्षीय पुत्र कुनाल और भतीजे अर्पित व उसका भाई वेद, यश उर्फ टुकटुक की मौत हो गई थी। अर्पित की मां पूजा घायल हैं। सुरेश की तबीयत बिगड़ गई थी। दोनों को मेडिकल कालेज के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
देर रात भतीजे आलोक की भी हो गई थी मौत
देर रात भतीजे आलोक ने भी दम तोड़ दिया था। विस्फोट से सुरेश के मकान के 200 मीटर दायरे में 10-12 घर क्षतिग्रस्त हुए। ईंटों के टुकड़े इतनी तेजी से टकराए कि दीवारों में छेद हो गए। बारूद से विस्फोट की चर्चा रही, लेकिन मुख्य अग्निशमन अधिकारी जसवीर सिंह ने सिलिंडर से विस्फोट की बात कही थी। भारत गैस के सेल्स आफीसर पवन भारतीय टीम ने बताया कि घर में चार सिलिंडर होने की बात सामने आई थी, जिनमें तीन सुरक्षित मिले हैं, जबकि एक मलबे में दबे होने की आशंका है। सिलिंडर से विस्फोट हुआ होता तो अलग-बगल की दीवारें टूट जातीं। ग्रामीणों ने बुधवार को मलबा हटाने का काम भी रुकवा दिया। उधर, पोस्टमार्टम के बाद पांचों शवों का गंगा किनारे कोटिया घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
