कभी पांच सीटों पर दबदबा… अब खोई जमीन, BSP से सियासी आगाज करने वाले नेताओं ने भी मोड़ा मुंह, जानें कहां?
बसपा, जिसने 1996 में फतेहपुर की छह में से पांच विधानसभा सीटें जीती थीं, अब अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही ...और पढ़ें

HighLights
1996 में बसपा ने फतेहपुर की पांच विधानसभा सीटें जीती थीं।
2022 चुनाव में बसपा को 13% वोट मिले, कोई सीट नहीं जीती।
बसपा से राजनीति शुरू करने वाले नेता अब भाजपा में।
जागरण संवाददाता, फतेहपुर। दो आबा की सियासत में मजबूत पकड़ रखने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अब अपने पुराने जनाधार को वापस पाने की चुनौती से जूझ रही है। वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह विधानसभा सीटों में से पांच खागा, किशुनपुर, हसवा, जहानाबाद और बिंदकी पर बसपा ने जीत दर्ज की थी।
इसके बाद भी बसपा का प्रभाव बना रहा, लेकिन पांच सीटों वाला प्रदर्शन दोहराया नहीं जा सका। कभी सियासत की क्षत्रप रही बसपा से राजनीति की शुरुआत कर विधायक बने अयोध्या पाल, आदित्य पांडेय, राजेंद्र पटेल पाला बदलकर इस समय भाजपा में है।
तेजी से बदली तस्वीर
वर्ष 2002 में बसपा ने खागा, हसवा और फतेहपुर सीट पर जीत दर्ज की। 2007 में किशुनपुर, हसवा, जहानाबाद और बिंदकी में पार्टी प्रत्याशी विजयी हुए। वर्ष 2012 में भी बसपा ने तीन सीटों हुसेनगंज, अयाहशाह और बिंदकी पर कब्जा किया। इसके बाद तस्वीर तेजी से बदली।
2017 और 2022 में भी पार्टी अपना खाता नहीं खोल सकी, इसके साथ ही पार्टी का आधार मत इतना खिसक गया कि पार्टी अब अपनी जमीन की तलाश करनी पड़ रही है। वर्ष 2022 के चुनाव में जिले की मौजूदा छह विधानसभा सीटों पर बसपा के प्रत्याशी मैदान में थे।
छह सीटों पर पार्टी को कुल 1,48,095 वोट मिले, जो इन सीटों पर पड़े कुल करीब 11.33 लाख वोटों का लगभग 13.1 प्रतिशत है। हालांकि, किसी सीट पर पार्टी जीत के करीब नहीं पहुंच सकी।
जहानाबाद में 20.8 प्रतिशत मत मिलने के कारण बसपा प्रत्याशी की जमानत बच गई, जबकि शेष पांच सीटों पर प्रत्याशी जमानत नहीं बचा सके। बसपा के लिए चुनौती केवल सीट जीतने की नहीं, बल्कि पुराने सामाजिक और चुनावी आधार को फिर से सक्रिय करने की भी है।
2022 में छह विधानसभा क्षेत्रों में बसपा का प्रदर्शन
| विधानसभा क्षेत्र | बसपा प्रत्याशी | मिले मत | मत प्रतिशत (%) |
| जहानाबाद | आदित्य पांडेय | 39,205 | 20.8 |
| बिंदकी | सुशील कुमार | 23,358 | 12.4 |
| अयाहशाह | चंदन सिंह | 22,045 | 13.9 |
| खागा | दशरथ लाल | 22,115 | 11.2 |
| हुसेनगंज | फरीद अहमद | 21,009 | 11.3 |
| फतेहपुर | अयूब अहमद | 20,363 | 9.6 |
| कुल | 1,48,095 | 13.1 | |
पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ मताधार
1996 में पांच सीटों तक पहुंची पार्टी का 2022 में किसी भी सीट पर जीत दर्ज न कर पाना उसके बदलते राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है। हालांकि छह में से पांच सीटों पर 9 से 14 प्रतिशत के बीच वोट मिलना यह भी बताता है कि पार्टी का मताधार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
अब आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन, प्रत्याशी चयन और पुराने मतदाताओं से जुड़ाव के जरिए बसपा इस आधार को कितना मजबूत कर पाती है, यह तो पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। हलांकि संगठन की मजबूती के लिए बसपा ने विधानसभा स्तर से लेकर बूथ तक की कमेटी गठित कर लिया है। मानीटरिंग के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में दो-दो प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
विधानसभा चुनाव 2027 को पूरी मजबूती से लड़ने के लिए हमारी तैयारी पूरी है। बूथ, सेक्टर से लेकर विधानसभा स्तर तक सम्मेलन कराए जा रहे है। सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर हम सबकों को साथ लेकर चल रहे है। पार्टी अपनी मजबूत वोट बैंक के बूते इस बार फिर परचम फहराएगी।
-वीर प्रकाश लोधी, बसपा जिलाध्यक्ष
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