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    माफिया अनुपम दुबे की भोगांव स्थित करीब 12.96 करोड़ की संपत्तियां भी कुर्क, अन्य जिलों में भी हो रही खोज

    Updated: Tue, 02 Dec 2025 08:06 AM (IST)

    माफिया अनुपम दुबे पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। मैनपुरी के भोगांव में स्थित उसकी 12.96 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई है। यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। इंस्पेक्टर रामनिवास यादव और ठेकेदार शमीम खान की हत्या में आजीवन कारावास काट रहा राज्य स्तरीय माफिया अनुपम दुबे पर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। उसके आर्थिक साम्राज्य पर बड़ी चोट करते हुए जिलाधिकारी ने गैंगस्टर एक्ट के तहत अब जनपद मैनपुरी के भोगांव में स्थित उसकी 12.96 करोड़ की संपत्तियों को भी कुर्क कर दिया है। इससे पूर्व अनुपम और उसके परिजनों की लगभग 1.71 अरब रुपये की संपत्तियां पहले ही जब्त की जा चुकी हैं।

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    तहसीलदार भोगांव की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित कुर्क की गई अचल संपत्तियों का सरकारी मूल्यांकन 5.07 करोड़ और बाजार मूल्य 12.96 करोड़ रुपये पाया गया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अनुपम दुबे, उसके परिजन और सहयोगियों द्वारा खरीदी गई इन संपत्तियों के लिए कोई वैधानिक आय स्रोत नहीं है।

    प्रशासन ने इसी आधार पर धारा 14(1) गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्की की कार्यवाही की संस्तुति की। मऊदरवाजा थाना प्रभारी की विगत 20 नवंबर की रिपोर्ट पर क्षेत्राधिकारी नगर और अपर पुलिस अधीक्षक ने जिलाधिकारी को संस्तुति भेजी थी। जिसके बाद जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने संपत्तियों की कुर्की के आदेश जारी किए।

    अन्य जनपदों तक पहुंची तलाश

    कसरट्टा निवासी अनुपम दुबे इंस्पेक्टर रामनिवास यादव और ठेकेदार शमीम खान की हत्या में दोषी करार दिए जाने के बाद मथुरा जेल में सजा काट रहा है। उसके विरुद्ध कोतवाली में 899/2021 गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज है।

    पुलिस का कहना है कि वर्षों से अपराध से अर्जित अवैध धन संपत्तियों में निवेश कर अनुपम ने बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अनुपम और उसके गिरोह ने फर्रुखाबाद के अलावा अलीगढ़, गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, कन्नौज और शाहजहांपुर में भी अनेक अचल संपत्तियां खरीदी हैं।

    कई संपत्तियां परिजन, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के नाम पर पंजीकृत मिली हैं। इसी क्रम में सभी संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्राचार कर अभिलेख मांगे गए हैं ताकि कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जा सके।