सरकार की कार को प्रदूषण मुक्त होने की दरकार

जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद : जो पुलिस सड़कों पर आम आदमी के वाहन चेकिंग करती है और प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र न होने पर चालान करती है। उसके खुद के ही अधिकांश वाहनों को यह प्रमाण पत्र नहीं मिले है। इन वाहनों की जांच नहीं कराई जाती,वे धड़ल्ले से धुआं उगलते हुए चलते हैं। ऐसे वाहन प्रशासनिक अधिकारियों के पास भी हैं, जिन्हें प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी नहीं हैं। शासन से जब इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई तो इसकी पोल खुली। 261 सरकारी वाहनों में महज 45 वाहनों के पास ही प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र मिला हुआ है।

बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार की ओर से नियम बनाए गए हैं कि सभी वाहन मालिक अपने वाहनों से उत्सर्जित होने वाले धुएं की जांच कराएं। तय मानक पर होने पर उसे प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र दिया जाता है। जिले में जिलाधिकारी, पुलिस, ग्राम्य विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग आदि के पास 261 वाहन पंजीकृत हैं। इसमें अधिकांश के पास प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र नहीं है। इस संबंध में शासन से जब सभी वाहनों की रिपोर्ट मांगी गई तो पता चला कि इन वाहनों में महज 45 वाहनों के पास ही प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण है। बाकी वाहनों के पास प्रदूषण मुक्त होने का कोई प्रमाण नहीं है। न ही इन वाहनों की जांच कराई जाती है। जो 45 वाहन हैं, वह नये हैं।

शासन के निर्देश पर शुरू हुई जांच

शासन से ऐसे वाहनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी तो बुधवार को उपसंभागीय परिवहन अधिकारी बृजेंद्र नाथ चौधरी व यात्री व माल-कर अधिकारी विजय किशोर आनंद ने चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान तीन सरकारी वाहन पकड़े गए तो उनका चालान कर दिया गया। इसके अलावा अन्य 36 वाहनों का सीट बेल्ट व हेलमेट न होने पर चालान किया गया।

जिले में आठ प्रदूषण जांच केंद्र

जिले में आठ लोगों को प्रदूषण जांच केंद्र संचालित करने का लाइसेंस दिया गया है। इन प्रदूषण जांच केंद्रों पर लोग जांच करा सकते हैं। हालांकि वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण इन केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। प्रदूषण जांच कराने के लिए दुपहिया वाहन पर 60 रुपये, पेट्रोल कार पर 70 रुपये और 100 रुपये डीजल वाहन के प्रदूषण जांच की फीस है।

10 हजार तक है जुर्माना

यात्री एवं मालकर अधिकारी ने बताया कि वाहनों पर अलग-अलग प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र न होने पर जुर्माना लगाया जाता है। जो कि एक हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक होता है।

‘जिले में चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया है। वाहन सरकारी हो या निजी। सभी पर समान रूप से कार्रवाई की जा रही है।’

- बृजेंद्र नाथ चौधरी, उप संभागीय परिवहन अधिकारी।

Edited By: Jagran