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UP Flood: फर्रुखाबाद में गंगा का रौद्र रूप, समैचीपुर चितार में चार मकान और तीन झोपड़ियां नदी में समाईं

Published: Sat, 29 Aug 2026 10:50 PM (IST)

गंगा का जलस्तर घटने के बाद शमसाबाद के समैचीपुर चितार में कटान तेज हो गया, जिससे चार पक्के मकान और ...और पढ़ें

ग्राम पंचायत समैचीपुर चितार में गंगा में कट रहे उजागर के मकान को देखते ग्रामीण। जागरण

ग्राम पंचायत समैचीपुर चितार में गंगा में कट रहे उजागर के मकान को देखते ग्रामीण। जागरण

जागरण टीम, फर्रुखाबाद। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद कटान तेज हो गया। ग्राम पंचायत समैचीपुर चितार में चार मकान व तीन झोपड़ी गंगा में कट गयीं। वहीं दो मकान व तीन झोपड़ियां कटान की जद में हैं। जिन्हें खाली करा दिया गया है। ग्रामीण सामान लेकर सुरक्षित पर जाने लगे हैं। गांवों में पानी कम होने से कीचड़ भी हो गया है। लोग उसी में आवागमन कर रहे हैं।

गंगा का जलस्तर कम होने के बाद ग्राम पंचायत समैचीपुर चितार में शनिवार सुबह तेजी से कटान शुरू हो गया। उजागर, पप्पू, अरमान व नसरुद्दीन के पक्के मकान देखते ही देखते गंगा में समा गए। जंतरी, कासिम व फहीम की झोपड़ियां गंगा में कट गयीं। ग्रामीण अपना सामान बैलगाड़ी में भरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों ने सड़कों पर अन्य सुरक्षित स्थानों पर डेरा जमा लिया है।

ग्रामीणों की मांग है कि उन लोगों को मकान बनाने के लिए प्रशासन जगह उपलब्ध कराए। क्षेत्रीय लेखपाल पंकज चौहान ने बताया कि चार मकान व तीन झोपड़ी गंगा में कट गई हैं। इन लोगों के रहने के लिए जगह देखी जा रही है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद इनको जगह उपलब्ध कराई जाएगी। ग्राम पंचायत कटरी तौफीक में खेतों में कटान चल रहा है। गांव में अंदर रास्तों पर पानी भरा है। जिससे कीचड़ हो गया है।

ग्राम पंचायत गढ़िया हैवतपुर के मजरा अचानकपुर में अभी भी पानी भरा है। जिसमें लोग घुसकर निकल रहे हैं। ग्राम पंचायत भगवानपुर, नगला बसोला, बांसखेड़ा व चंपतपुर आदि में पानी भरे रहने से गांव के अंदर कीचड़ हो गया है। जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जलस्तर घटने के बाद भी खतरे के निशान के करीब गंगा

गंगा का जलस्तर घटने के बाद भी खतरे के निशान से 15 सेंटीमीटर नीचे बह रहा है। घरों में पानी भरा होने से पीड़ित ग्रामीण मकान की छत व सड़क किनारे पालीथीन के नीचे परिवार के साथ गुजर कर रहे हैं। दोपहर को तेज धूप निकलने से पीड़ित गर्मी में बेहाल रहे। ग्रामीण व बच्चे सड़क किनारे पेड़ के नीचे बैठे दिन गुजारते रहे। संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी बहने से आवागमन बाधित है। जिससे ग्रामीण नाव के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। नाव के इंतजार में ग्रामीणों को बैठना पड़ता है। पश्चिमी गौटिया के घरों के बाहर बाढ़ का पानी भरा होने से ग्रामीण ट्यूब के सहारे आवाजाही कर रहे हैं।

गंगा का जलस्तर शनिवार को 10 सेंटीमीटर घटकर समुद्र तल से 136.95 मीटर ऊंचाई पर पहुंच गया है। गंगा का खतरे का निशान 137.10 मीटर पर दर्ज है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक नरौरा बांध से गंगा में 77,819 क्यूसेक, हरिद्वार बैराज से 69,537 क्यूसेक व बिजनौर से 46,912 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर घटकर 135.75 मीटर ऊंचाई पर पहुंच गया है। खोह, हरेली व रामनगर से रामगंगा में 5810 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंगा का जलस्तर घटने के बाद भी अमृतपुर क्षेत्र के तटवर्ती गांवों व घरों में बाढ़ का पानी भरा है। जिससे ग्रामीण मकान की छत व सड़क किनारे पालीथीन के नीचे गुजर कर रहे हैं।

यहां हालात खराब

  • उदयपुर के संपर्क मार्ग पर बाढ़ का पानी बह रहा है। जिससे ग्रामीण खेत में भरे बाढ़ के पानी में निकल कर आवाजाही कर रहे हैं।
  • पश्चिमी गौटिया के कई घरों के बाहर बाढ़ का पानी भरा है। करीब तीन फीट पानी में निकलकर लोग आवाजाही करते हैं।
  • पट्टी भरखा के घरों के बाहर बाढ़ का पानी भरा है। जिससे लोग पानी से निकलकर आवाजाही कर रहे हैं।
  • भरखा गांव के निकट संपर्क मार्ग पर डेढ़ फीट पानी तेज धार से बह रहा है।
  • चित्रकूट डिप पर डेढ़ फीट से अधिक पानी तेज धार से बह रहा है। जिससे बदायूं मार्ग पर आवागमन बंद है। लोग निविया व डबरी मार्ग से होकर जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं।