जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद: रोजा स्वस्थ रहने के लिए भी एक अच्छा साधन है। इससे खून में कॉलेस्ट्राल और शुगर की मात्रा कम हो जाती है। पूरे शरीर का डिटॉक्सीफिकेशन हो जाता है। रोजे में इफ्तार और सहरी में तले हुए पदार्थ जैसे कचौड़ी-पकौड़ी आदि से परहेज करना चाहिए। हरी सब्जियों और ताजे फलों के अलावा सलाद कैसे ककड़ी खीरा खरबूजा आदि का सेवन अधिक करें।

डिहाइड्रेशन को रोकने के लिए अधिक से अधिक तरल पदार्थ जैसे शरबत, शिकंजी, जूस आदि का सेवन करें। रात में तुख्म मलंगा के बीज पानी में भिगो दें। सहरी में इन्हें मसल कर मिश्री मिला कर पीलें, तो दिन प्यास कम लगेगी। सत्तू का सेवन भी फायदेमंद है। ताकत के लिए फ्रूट-चाट का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। दूध-दही आदि का भी उपयोग किया जा सकता है। अधिक खाना खाने से अपच की समस्या पैदा हो सकती है। मैदा और रिफाइंड तेलों का अधिक सेवन और फाइबर की आहार में कमी से भी कई समस्याएं बढ़ती हैं। नार्वे में होता है 20 घंटे का रोजा

रोजा संसार के लगभग सभी धर्मों में किसी न किसी रूप में प्रचलित है। इसे आदि काल से ही ईश्वर के करीब होने का साधन माना जाता रहा है। इस्लाम में रमजान के मुबारक महीने में रोजा रखना फर्ज है। रमजान की फजीलत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अल्लाह ने अपने नबियों पर सभी आसमानी किताबें तौरेत, जुबूर, इंजील आदि इसी माह में नाजिल कीं। हमारे देश के सनातन धर्म में भी पूर्णिमा और एकादशी के व्रत प्रचलित हैं। ईसाई, यहूदी और जैन धर्म में 40 व्रत होते हैं। रोजे के दौरान सुबह सहरी से इफ्तार तक कुछ खाना पीना मना है। विश्व के उत्तरी क्षेत्रों में जैसे नार्वे में 20 घंटों से अधिक का रोजा होता है, जबकि हमारे यहां 15 घंटे का हो रहा है। रोजे का उद्देश्य

रोजे के धार्मिक महत्व के अलावा इसका उद्देश्य व्यक्ति को बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रशिक्षित करने, उसे भूख और प्यास की शिद्दत व तकलीफ का एहसास करने और उसमें इसे बर्दाश्त करने की क्षमता विकसित करने के अलावा व्यक्ति को शारीरिक व आत्मिक रूप से बलवान करने का है। - डा. मोहम्मद मोहसिन

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप