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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 11, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली से नैतिक मूल्यों का पतन

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Published: Mon, 11 Feb 2013 12:56 AM (IST)Updated: Mon, 11 Feb 2013 11:02 AM (IST)

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फर्रुखाबाद, कार्यालय संवाददाता : मेला रामनगरिया में चल रहे आर्य उप प्रतिनिधि सभा के चरित्र निर्माण शिविर में कोलकाता से आए डा. ब्रह्मादत्त शास्त्री ने युवा पुरोहितों को नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली दोषपूर्ण है। इससे युवाओं में नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। उन्होंने बताया कि माता पिता व आचार्य अपने पुत्र या शिष्य के प्रति ऊपर से भय लेकिन अंदर से कृपा दृष्टि रखें। आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि अंग्रेजों की शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य हमें नौकर बनाना था। युवा पीढ़ी आज भी उसी प्रणाली से शिक्षा ग्रहण कर रही है, जिससे समाज में भ्रष्टाचार, महंगाई व दुष्कर्म जैसी बुराइयां पनप रही हैं। युवाओं को वेदों की शिक्षा देकर इन समस्याओं से निजात पाई जा सकती है। अर्जुन आर्य, प्रमोद यादव, विभाष सिद्धांत व निर्मला आर्य ने भजन सुनाए।

औपचारिकता बना पंच सम्मेलन

रामनगरिया मेले में पंच सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य विकास अधिकारी आईपी पाण्डेय ने फीता काटकर किया। अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर भी मौजूद थे। पंच सम्मेलन में प्रधान जमील अहमद, मुकेश कुमार, मुन्नी देवी, राखी गौतम आदि ने हिस्सा लिया। उद्घाटन के बाद पंच सम्मेलन सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया। गंगा स्वच्छता अभियान के संतोष प्रजापति ने रामनगरिया मेले में स्टीकर वितरित कर श्रद्धालुओं से गंगा में अपशिष्ट सामग्री न फेंकने की अपील की।

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