अयोध्या: अवध विश्वविद्यालय के इंजीनियरों व विज्ञानियों ने अपनी मेधा के बल कर कमाल कर दिया। कुछ विज्ञानियों के शोध कार्य को वैश्विक मुकाम मिल चुका है तो कई ने शोध को पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया है। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में विवि के फैकल्टी डॉ. तरुण गंगवार ने अपनी टीम के साथ मिल कर ऐसा सैनिटाइजर टूल बनाया, जो सस्ता व टिकाऊ है। इसे पेटेंट कराने के आवेदन किया गया है। यह एक साथ चारों दिशाओं में सैनिटाइजेशन करता है। इसी तरह अन्य विज्ञानियों के भी शोधकार्य हैं, जिनके पेटेंट के आवेदन किया जा चुका है। खेती किसानी पर भविष्यवाणी करने वाले सिस्टम का पेटेंट हो चुका है।

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तरुण की टीम ने बनाया सस्ता सैनिटाइजर टूल

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अयोध्या: वैज्ञानिक डॉ. तरुण गंगवार ने स्मार्ट हैवी ड्यूटी स्प्रे टूल तैयार किया। ये एक स्थान से चारों दिशाओं में सैनिटाइजेशन करता है। इसे 70 से 80 रुपये में बाजार में उतारने की तैयारी है। यह अन्य सैनिटाइजिग टूल से सस्ता है। इसे विशेष रूप से एसी कमरों के लिए बनाया गया है। इससे पांच मिनट में सामान्य कमरा सैनिटाइज हो जाता है। इसकी बॉडी प्लास्टिक की और रंग चमकीला है। फाइनल रूप से इसे टेफ्लॉन में ढाल कर उतारा जाएगा। इसमें एक पानी खींचने वाली मशीन की तरह हैवी डिस्पेंसर लगा है जो द्रव्य के रूप में भरे सैनिटाइजर को खींचता है। इसी मोड पर लगा नोजल इसे गैस में बदल कर कमरे में फैलाता और सैनिटाइज करता है। देखते ही देखते पांच मिनट में कमरा सैनिटाइज हो जाता है, लेकिन शर्त है कि कमरे के दरवाजे व खिड़कियां बंद होने चाहिए। यदि ऐसा नहीं होगा तो ये कम क्षेत्रफल को ही सैनिटाइज करेगा। इसकी लागत 50 रुपये है। इस शोधकार्य में डॉ. तरुण के अलावा एक वैज्ञानिक, एक डिजाइनर है और छह इंजीनियर लगे हैं। भोपाल के वैज्ञानिक डॉ. मोहित गंगवार मॉडल डिजाइन करने में अग्रणी रहे। डॉ. गंगवार बताते हैं कि ये डिवाइस जेब में आसानी से रखी जा सकती है। इसे रिफिल किया जा सकता है। दूसरी कंपनियों के सैनिटाइजिग डिवाइस को फेकना पड़ता है। --------

इंटीग्रल सिस्टम करेगा खेती की भविष्यवाणी

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अयोध्या: खेती-किसानी के लिए डॉ. अमित भाटी ने इंटीग्रल सिस्टम बनाया है, जिसका पेटेंट हो चुका है। उन्होंने इसे इंटरनेट ऑफ थिक्स टेक्नॉलॉजी व मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर बनाने में सफलता पाई। यह मशीन फसलों के बारे में भविष्यवाणी करती है। ये किसानों के लिए काफी मुफीद है। ये सिस्टम किसान को खेत की मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में बताएगा, फसल को मॉनिटर कर जैविक खाद के प्रयोग के बारे में सूचित करेगा व कीटनाशक का छिड़काव करने का समय बताएगा। ये सिस्टम फसल में मौसम के अनुसार लगने वाली बीमारी के बारे में पहले से अलर्ट करेगा व रोकथाम के उपाय भी सुझाएगा। अमित भाटी को प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए भारत सरकार एवं व‌र्ल्ड बैंक ने सात लाख 80 हजार अनुदान राशि भी दी है। अक्टूबर 2019 में इस सिस्टम को भाटी ने पेटेंट करा लिया। इस सिस्टम में पहले से छह माह तक का आंकड़ा फीड किया जाता है, जिसके विश्लेषण के आधार पर सिस्टम भविष्यवाणी करता है।

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आशीष का शोध दिलाएगा नेटवर्किंग समस्या से निजात

संसू, अयोध्या: वैज्ञानिक आशीष गुप्त का शोध मोबाइल के नेटवर्क पर है। उन्होंने टूजी, थ्रीजी व फोरजी नेटवर्क को जोड़कर एक सिगल नेटवर्क बनाया है। इसका बाकायदा प्रोग्राम बनाकर देखा तो पाया गया कि इससे नेटवर्क डिस्कनेट होने की समस्या दूर हो जाती है। उन्होंने एड-हॉक नेटवर्क सेल्स का इस्तेमाल कर नेटवर्क आर्किटेक्चर और इसके बुनियादी ढांचे का विस्तार कर मोबाइल सेवा क्षमता को बढ़ाया। इसे हाइब्रिड नेटवर्क कहा जाता है। आशीष ने बताया कि पारंपरिक एड-हॉक और इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क जैसी समस्याओं से भी निजात मिलेगी। इससे बार-बार कॉल डिस्कनेक्ट होने की समस्या से निजात मिल जाएगी। इसके पेटेंट के लिए आवेदन हुआ है।

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हवा की ऊर्जा का प्रयोग कर चलेंगे दो पहिया वाहन

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अयोध्या: इंजीनियरिग कॉलेज के निदेशक प्रो. रमापति मिश्र ने पवन टर्बाइन आधारित हाइब्रिड टू व्हीलर वाहन प्रणाली विकसित की है। यह मॉडल दो पहिया वाहनों को हवा और पेट्रोल की जगह विद्युत ऊर्जा स्त्रोत से संचालित करेगा। इसमें पवन ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। वाहन की बैटरी को एकीकृत पवन टर्बाइन का प्रयोग करके चार्ज किया जाता है। मॉडल में वाहन के आगे और पीछे की वस्तुओं का पता लगाने के लिए सेंसर भी लगाए गए हैं। इसे भी पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया गया है।

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नाला चोक होने की सूचना देगा ड्रोन

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अयोध्या: विज्ञानी परितोष त्रिपाठी व विनीत कुमार सिंह ने एक ड्रोन विकसित किया है, जो बरसात के पानी की सैंपलिग कर यह बताएगा कि कौन सा नाला चोक है। यह आविष्कार किसी स्थान की जलनिकासी लाइनों के मैपिग प्रणाली से संबंधित है। इस सिस्टम में ड्रोन होते हैं, जो सतह की छवियों को कैप्चर कर सर्वर पर चित्र को स्थानांतरित करते हैं। इसके बाद सर्वर ड्रेनेज लाइन की मैपिग कर नाला चोक होने की सूचना देगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग किया गया है। इसके लिए पेटेंट का आवेदन किया जा चुका है।