अयोध्या [रमाशरण अवस्थी]। श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में कल से रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का समाधान तलाशा जाएगा। इसके लिए आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर कल चार्टेड प्लेन से आएंगे। अयोध्या में कल से इस मामले की सुनवाई की जाएगी।

पक्षकारों के बीच विवाद का समाधान तलाशने के लिए सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय कमेटी में श्रीश्री शामिल हैं। सेवानिवृत्त न्यायाधीश फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में गठित कमेटी के तीसरे सदस्य वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि के इंजीनियरिंग कॉलेज के गेंदालाल दीक्षित गेस्ट हाउस में विवाद की सुनवाई के साथ आवासीय व्यवस्था की गई है। गेस्ट हाउस में किसी प्रकार की कमी न रह जाए इस लिहाज से विभिन्न विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यहां के एक अधिकारी तो गेस्ट हाउस को पांच सितारा सुविधा वाले होटल से उन्नीस नहीं बताते। 12 मार्च से तीन दिन तक सुनवाई गेस्ट हाउस में चलेगी। प्रकरण सुप्रीमकोर्ट से जुड़ा होने की वजह से गोपनीयता बरती जा रही है। एक भी अधिकारी इस बारे में ऑन द रिकार्ड बोलने को तैयार नहीं।

जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने अपने आवास पर अधिकारियों संग बैठक की। अधिकारियों को गेस्ट हाउस से संबंधित तैयारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज दोपहर तक गेस्ट हाउस में तैयारियां पूरी करने की डेड लाइन अधिकारियों को दी गई है। इसके बाद उसे फाइनल टच कमिश्नर मनोज मिश्र एवं जिलाधिकारी देंगे। पुलिस के अनुसार गेस्ट हाउस के रास्ते में बैरियर भी लगेंगे। किसी भी शख्स का गेस्ट हाउस की तरफ जाना प्रतिबंधित होगा। सुरक्षा के लिहाज से चाक-चौबंद व्यवस्था का निर्देश है।

श्रीश्री रविशंकर का अयोध्या से काफी पुराना जुड़ाव

मंदिर-मस्जिद विवाद सुलझाने के लिए सुप्रीमकोर्ट की निगरानी में गठित तीन सदस्यीय पैनल में शामिल शीर्ष धर्माचार्य श्रीश्री रविशंकर का रामनगरी से जुड़ाव काफी पुराना है। 2002 में पहली बार घोषित तौर पर अनुयायियों के जत्थे के साथ रामनगरी पहुंचे। इस यात्रा का उनका घोषित मकसद धार्मिक था पर यहां पहुंचकर उन्होंने अध्यात्म के साथ अयोध्या की साझी संस्कृति भी साधी। उनकी यहां पर इस यात्रा से कुछ चुङ्क्षनदा मुस्लिम भी जुड़े थे। मंदिर-मस्जिद विवाद की धुरी से मानवीय एकता का उनका आह्वान काफी महत्वपूर्ण माना गया था और तभी यह संकेत मिल गया था कि श्रीश्री मंदिर-मस्जिद विवाद के समाधान में दिलचस्पी ले सकते हैं। करीब पांच वर्ष बाद वे पुन: रामनगरी की ओर उन्मुख हुए।

इस बार भी उन्होंने मंदिर-मस्जिद विवाद के बारे में खुलकर तो कुछ नहीं कहा पर अयोध्या से मैत्री-करुणा का संदेश देकर इशारों में ही काफी कुछ कह गए और इस उम्मीद को बल प्रदान कर गए कि उन जैसा शीर्ष धर्माचार्य अपने उदार रुख के साथ मंदिर-मस्जिद विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी संभावना बन सकता है। श्रीश्री की 2013 में तीसरी बार रामनगरी की यात्रा विशुद्ध रूप से धार्मिक साबित हुई और वे मंदिर-मस्जिद विवाद का सांकेतिक स्पर्श करने से आगे नहीं बढ़ सके पर 2017 में जब तत्कालीन सीजेआई जेएस खेहर ने आपसी सहमति से मंदिर-मस्जिद विवाद हल करने का सुझाव दिया, तब श्रीश्री खुलकर आपसी सहमति के लिए आगे आए। इसी मुहिम को कामयाब बनाने के लिए गत डेढ़ वर्ष के दौरान श्रीश्री स्वयं तथा उनके दूतों ने रामनगरी को जमकर खंगाला और दोनों पक्षों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की।

इसी दौरान उन्होंने मौलाना सलमान नदवी जैसे शीर्ष इस्लामिक विचारक से लेकर अनेक स्थानीय मुस्लिमों का समर्थन हासिल किया। हालांकि वे कामयाब नहीं हो सके पर विवाद सुलझाने के लिए उस समय उनकी मध्यस्थता आज की तरह देश की सर्वोच्च अदालत से संरक्षित-स्वीकृत नहीं था। इस बार मध्यस्थ के तौर पर उनके आगमन का अलग प्रभाव होगा और यह उम्मीद अनुचित नहीं होगा कि श्रीश्री के प्रयास देश के सबसे बड़े विवाद से निजात दिला सकते हैं। 

Posted By: Dharmendra Pandey