अयोध्या : प्रधानमंत्री रहते इंदिरा गांधी को जब दादरा सुनाया तो बदले में क्या चाहिए? इस सवाल पर शास्त्रीय गायकी में अवध की शान बेगम अख्तर ने दोबारा हज यात्रा की ख्वाहिश जाहिर की। इस पर इंदिराजी ने नियम शिथिल करते हुए पहली हज यात्रा के महज छह माह बाद ही उनकी दोबारा हज जाने की तमन्ना पूरी कर दी। यह जानकारी सामने आयी चर्चित रचना 'अख्तरी: बेगम अख्तर के जीवन के अफसाने' के लेखक यतींद्र मिश्र एवं भातखंडे समविश्वविद्यालय लखनऊ की कुलपति एवं शास्त्रीय गायिका श्रुति सडोलीकर काटकर से संवाद में। वे फैजाबाद पुस्तक मेला में आयोजित एक मुलाकात कार्यक्रम को आयाम दे रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन नारायणदास खत्री मेमोरियल ट्रस्ट ने किया।

बेगम अख्तर की गायकी को भले ही लखनऊ में मुकाम मिला। ..पर शुरुआती दौर में उनकी शास्त्रीय गायकी ने अयोध्या राजपरिवार के सानिध्य में ही छटा बिखेरी। यही कारण है कि अयोध्या राजपरिवार के सदस्य यतींद्र मिश्र की उन पर लिखी बातें तथ्यात्मक ²ष्टि से परिपूर्ण, विश्वनीय तो हैं ही, उनका लेखकीय कौशल भी 'अख्तरी' में झलक रहा है। बातचीत के दौरान काटकर ने इसे खुलकर स्वीकारा। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा तो यतींद्र ने अपने परिवार के सदस्यों की उनसे जुड़ी यादें, राजसदन में उनकी मौसीकी की यात्रा को नई पीढ़ी के सामने खुलकर साझा किया। इस दौरान बेगम अख्तर का सानिध्य प्राप्त कर चुकी काटकर ने शास्त्रीय गायिकी की शुरुआत, रियाज का तरीेका, उसकी खासियत पर तो चर्चा की ही, सामाजिक वर्जनाओं के चलते कोठा के नक्खास से हजरतगंज का सफर तय करने को भी बयां किया।

चर्चा में यह बात भी उभर कर सामने आई कि बेगम अख्तर शौकीन मिजाज की थीं। सजना-संवरना और सलीके से उठना-बैठक उनकी रवायत का हिस्सा था। खानपान भी आला दर्जे का था। उनसे मुलाकात भी सहज नहीं थी। पहले आठ-दस दिन सिलसिलेवार आना, फिर पिछली कतार में बैठना पड़ता था। इस परिचर्चा का लुत्फ उठाने एवं ज्ञानव‌र्द्धन करने के लिए कला-संगीत प्रेमी उपस्थित थे। इनमें मंजुला झुनझुनवाला, मेला प्रभारी रीता खत्री, नमिता मेहरोत्रा, सबा अदील, पुनीत मेहरोत्रा, राकेश केसरवानी प्रमुख थे। ट्रस्ट की ओर से अगुवानी कोषाध्यक्ष राजकुमार खत्री ने की।

Posted By: Jagran

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