अयोध्या: विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) की जांच की आंच से एक बार फिर से पशुपालन विभाग पहुंची है। करीब छह वर्ष से बोतल में बंद पशुधन प्रसार अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया का जिन्न एसआइटी की आंच के साथ एक बार फिर से बाहर आ गया है। एसआइटी ने ऑप्टिकल मार्क रीड (ओएमआर) शीट मांग कर अचानक हलचल बढ़ा दी है। एसआईटी की तेजी से उस समय नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल कर्मचारी डरे हुए हैं। एसआईटी को इसे उपलब्ध कराने के लिए अपर निदेशक ग्रेड-दो डॉ.एसके सिंह ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसी कमेटी को प्राप्त ओएमआर शीट, प्रयुक्त व अप्रयुक्त शीट का विवरण विवरण एसआईटी को उपलब्ध कराना है। कमेटी में पशु चिकित्साधिकारी गोसाईंगज-डॉ. अजयकुमार, मयाबाजार-डॉ. राजेश पटेल व डॉ. प्रेमचंद्र वर्मा-पशु चिकित्साधिकारी शुजागंज शामिल हैं। एडी ग्रेड-टू के अनुसार एसआइटी ने संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए समय नहीं तय है। जांच के लिए अभिलेख उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी गठित कमेटी की है। नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत पर शासन से एसआईटी गठित कर जांच कराने का आदेश दिया है। पशुपालन के पशुधन प्रसार अधिकारी पद पर यह नियुक्ति वर्ष 2013-14 की है। इसमें दो एडी ग्रेड-टू डॉ. अनूपकुमार व केपी सिंह पहले निलंबित हो चुके हैं। एक एडी ग्रेड-टू कृपाशंकर की सेवानिवृत्त के बाद पेंशन रुकी है। उनके अनुसार चयन प्रक्रिया पहले की थी। मंडल में 115 पशुधन प्रसार अधिकारियों की तैनाती हुई थी जिसमें से छह ने ज्वाइन नहीं किया। एसआईटी की आहट से पशुपालन विभाग में फिर से खलबली मची हुई है। करीब डेढ़ वर्ष पहले भी निदेशक पशुपालन, प्रशासन एवं विकास डॉ. यूके सिंह के निर्देश पर पशुधन प्रसार अधिकारी पद पर नियुक्ति प्रक्रिया की पांच बिदुओं की सूचना एसआईटी को उपलब्ध कराई जा चुकी है। नियुक्त प्रक्रिया की परीक्षा से जुड़े संबंधित विवरण एसआईटी ने फिर मांगे हैं।

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