अयोध्या: डिप्टी कलेक्टर विनोद कुमार सिंह व रामशंकर के खिलाफ जांच आगे नहीं बढ़ सकी है। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की संस्तुति पर इन दोनों के विरुद्ध शासन ने जांच का आदेश दिया है। मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल जांच अधिकारी नामित हैं। डिप्टी कलेक्टर विनोद कुमार सिंह बलरामपुर में एसडीएम हैं जबकि रामशंकर जिले में ही तैनात हैं। इन दोनों पर सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) रहते हुए भूमि विवाद से संबंधित मुकदमे में एक पक्ष को विधि विरुद्ध लाभ पहुंचाने का आरोप है। भूमि विवाद से संबंधित एक मुकदमे में वासुदेवघाट-अयोध्या निवासी राजकुमार त्रिपाठी व सत्यदेव त्रिपाठी ने एआरओ रामशंकर पर आरोप लगाया कि माझा मीरापुर द्वाबा स्थित भूमि से जुड़े दाखिल खारिज के नौ मुकदमों में रवि बंसल व अरविद मौर्य को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए फारच्यूनर वाहन रिश्वत में लिया। साक्ष्य के तौर पर आरोपपत्र के साथ सीडीओ की जांच आख्या, सीआरओ की जांच रिपोर्ट, राजकुमार का शिकायती पत्र व जिलाधिकारी का शासन को प्रेषित पत्र, शासन को भेजा गया है। एआरओ विनोद कुमार सिंह से संबंधित दूसरा प्रकरण माझा तिहुरा की भूमि से संबंधित शहनेवाजपुर निवासी चंद्रबली पुत्र बासू की भूमि से जुड़ी शिकायत का है। उसे बिना सुनवाई का मौका दिए पांच नवंबर 2018 को उसके विरुद्ध नामांतरण आदेश एआरओ विनोद कुमार सिंह ने पारित कर दिया। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने दोनों प्रकरणों की जांच मुख्य राजस्व अधिकारी पीडी गुप्त से कराई। जांच में एआरओ के फैसले पर सीआरओ ने अंगुली उठाई है। दोनों के विरुद्ध आरोपपत्र व साक्ष्य समेत विशेष सचिव, नियुक्ति अनुभाग-03 को करीब पांच माह पहले जिलाधिकारी भेज चुके हैं। दोनों डिप्टी कलेक्टर आरोपपत्र का जवाब देने के लिए साक्ष्य मांग रहे हैं शासन से दोनों को साक्ष्य मिलने का इंतजार है। शासन से अभी तक साक्ष्य न उपलब्ध कराए जाने से जांच अटक गई है।

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