अयोध्या : रामनगरी जैसी महत्वपूर्ण स्थली होने के कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में अयोध्या के शामिल होने को नजरंदाज कर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के मामले में लापरवाही आखिरकार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार गुप्त पर भारी पड़ गई। उन्हें हटाने के निर्देश मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने सोमवार को दे दिए। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारी सकते में आ गए हैं। इसी के साथ कई और पर भी तलवार लटकती नजर आ रही है।

जिले में चिकित्सा सेवा के साथ संस्थागत प्रसव, आयुष्मान भारत योजना, मीजिल्स-रूबेला टीकाकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं चल रही हैं। बावजूद इसके, पीएचसी व सीएचसी पर तैनात चिकित्साधिकारियों की डयूटी पर उपस्थिति काफी कम रहती थी। यह बात जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार के पिछले माह व इससे पूर्व निरीक्षण में भी बेनकाब हो चुकी थी। इस बाबत हुई वीडियो कांफ्रें¨सग में भी सीएमओ विलंब से पहुंचे। यह बात शासन के संज्ञान में आ गई। मीजिल्स व रूबेला समेत विभिन्न टीकाकरण तथा आयुष्मान भारत योजना में जिले के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काफी फिसड्डी पाए गए थे। इनमें सोहावल, पूराबाजार, रुदौली व मवई शामिल हैं। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक आनंद इस बारे में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी को बुलाकर जिम्मेदारों पर सख्ती की हिदायत दे चुके थे, फिर भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा था। इसकी गाज आखिरकार मुख्य चिकित्साधिकारी पर गिर गई। सीएमओ के पद पर डॉ. अशोक कुमार गुप्त की तैनाती जुलाई 2018 में हुई थी। इस दौरान दीपोत्सव समेत कई अन्य कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या आए तो यहां के जनप्रतिनिधियों ने भी उन्हें लचर चिकित्सा सेवाओं से अवगत कराया था, लेकिन बतौर सीएमओ उसमें सुधार ला पाने में डॉ. गुप्त नाकाम थे।

Posted By: Jagran