अयोध्या : भाजपा की जीत अलनाहक नहीं है। भाजपा ने लोगों के मर्म को छूने वाले राष्ट्रवाद के मुद्दे को आमजन के जेहन में इस कदर चस्पा किया कि मतदान के दिन वह कमल खिलाने के लिए बूथों की ओर निकला। चुनाव परिणाम आए तो साफ हो गया कि जिन मुद्दों पर विपक्षी दल भाजपा को घेर रहे थे वे राष्ट्रवाद, प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत छवि के साथ गांवों एवं गरीबों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों के सामने बेअसर साबित हुए। इसमें राफेल में अंबानी को लाभ पहुंचाने, नोटबंदी, बेसहारा पशुओं से नुकसान थे, लेकिन ये मुद्दे भाजपा की राह की बाधा न बन सके। वहीं कांग्रेस की न्याय योजना एवं कर्जमाफी का वादा किसानों का विश्वास नहीं जीत सका।

अब तक यहां प्रभावित होता राममंदिर का मसला इस बार भाजपा ने ठंडे बस्ते के हवाले कर रखा था और संतों की उम्मीद के विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या से दूरी बनाए रखी। चुनाव के चंद माह पहले भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना प्रमुख उधव ठाकरे ने यहां का दौरा कर भाजपा को इस मसले पर कटघरे में खड़ा किया। यही नहीं भाजपा विरोधी दल भी इस मसले को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे थे। बावजूद इसके, बहुसंख्यक मतदाताओं में भाजपा की राममंदिर समर्थक दल की छवि अभी बरकरार है।

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प्रभावशाली मुद्दे -आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर आमजन में भरोसा।

-पाकिस्तान में सर्जिकल स्टाइक से प्रखर राष्ट्रवाद की भावना का उभार।

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति मतदाताओं का सम्मोहन बरकरार रहना।

-सौभाग्य के माध्यम से गांवों का विद्युतीकरण व आपूर्ति में सुधार होना।

-किसान सम्मान निधि ने किसानों को प्रति वर्ष छह हजार रुपये का वितरण।

-उज्ज्वला योजना के तहत गरीब घरों की महिलाओं में रसोईंगैस का वितरण।

-प्रधानमंत्री आवास योजना ने कमजोर वर्ग को दिलाई कच्चे मकानों से निजात।

-आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज।

-गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनवाया जाना।

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Posted By: Jagran

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