अयोध्या : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बीएचयू का विवाद रामनगरी तक पहुंच गया। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म संकाय के साहित्य विभाग में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध में गुरुवार को रामनगरी के संतों ने ताल ठोंकी।

उत्तर तोताद्रि मठ में मीडिया से मुखातिब जाने-माने कथाव्यास जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ. राघवाचार्य ने कहा, डॉ. फिरोज खान को किसी अन्य विभाग में ट्रांसफर नहीं किया गया तो अयोध्या के संतों के नेतृत्व में पूरे भारत का संत समाज वृहद आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा, बीएचयू में संस्कृत विद्या धर्म संकाय के साहित्य विभाग में एक दूसरे समुदाय के प्रोफेसर की नियुक्ति गलत है। क्योंकि वहां भाषा नहीं पढ़ाई जाती, वहां सनातन धर्म पर रिसर्च होता है।वहां एक ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति की गई है, जिसे सनातन धर्म के बारे में कुछ भी पता नहीं है। ऐसे में हमारे रिसर्च स्कॉलर को वह क्या शिक्षा देंगे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के साथ छेड़-छाड़ का बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। बीएचयू के कुलपति डॉ. राकेश भटनागर जेएनयू के प्रोडक्ट हैं और जेएनयू वही स्थान है, जहां देश विरोधी नारे लगते हैं। ऐसे देशविरोधी संस्थान से आए भटनागर सनातन धर्म को विखंडित करने का कार्य ऐसी नियुक्ति करके कर रहे हैं। उन्होंने कहा, फिरोज खान की भाषागत विद्वता पर हम कोई प्रश्नचिह्न नहीं खड़ा कर रहे हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति गलत विभाग में हुई है। तोताद्रि मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी अनंताचार्य ने कहा, बीएचयू में जो खेल खेला जा रहा है, उससे सनातन धर्म को बर्बाद करने की बू आ रही है।

संत समिति के महामंत्री महंत पवन शास्त्री ने कहा, कुछ लोगों की ऐसी भी मंशा थी कि बीएचयू से हिदू शब्द हटा दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब जहां से हमारी सनातन संस्कृति का रिसर्च होगा, वहां दूसरे समुदाय की नियुक्ति कर सनातन धर्म को तोड़ने की साजिश रची जा रही है।

Posted By: Jagran

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