सैफई मेडिकल कॉलेज बनेगा प्रदेश की डिजिटल रेफरल व्यवस्था का पहला केंद्र, पांच जिलों के स्वास्थ्य संस्थान जुड़ेंगे
उत्तर प्रदेश में गंभीर मरीजों के लिए 'ई-सारथी' डिजिटल रेफरल व्यवस्था शुरू की जा रही है, जिसका नोडल केंद्र सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय होगा।

सैफई मेडकल कॉलेज। (तस्वीर- फाइल)
HighLights
डिजिटल रेफरल व्यवस्था 'ई-सारथी' उत्तर प्रदेश में शुरू।
सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय बना इसका नोडल केंद्र।
मरीजों को समय पर उपचार, बिस्तर उपलब्धता की जानकारी मिलेगी।
वीपी सिंह यादव, इटावा। गंभीर मरीजों को समय पर उचित अस्पताल में उपचार उपलब्ध कराने और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने के दौरान होने वाली परेशानी कम करने के लिए प्रदेश में डिजिटल रेफरल व्यवस्था शुरू की जा रही है।
शासन ने ‘ई-सारथी’ (e-SARTHI) डिजिटल रोगी रेफरल प्लेटफॉर्म के पायलट संचालन का आदेश जारी किया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई को नोडल केंद्र और रेफरल हब बनाया गया है।
रेफरल का अर्थ है मरीज को बेहतर या विशेष उपचार के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजना। डिजिटल रेफरल व्यवस्था में यह प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से होगी।
मरीज को दूसरे अस्पताल भेजने से पहले वहां बिस्तर और जरूरी विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही मरीज को भेजने वाले और उपचार देने वाले अस्पताल के बीच समन्वय स्थापित होगा, जिससे मरीज को अनावश्यक भटकना न पड़े और उपचार में देरी कम हो सके।
प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा वी. हेकाली झिमोमी की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, पायलट परियोजना में इटावा, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी और फिरोजाबाद के चयनित स्वास्थ्य संस्थानों को सैफई केंद्र से जोड़ा जाएगा।
संबंधित संस्थानों के प्रमुख नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे, जो बिस्तरों की उपलब्धता, विशेषज्ञ सेवाओं और रेफरल की स्थिति की जानकारी समय से अद्यतन रखेंगे। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय निगरानी करेंगे, जबकि उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट तकनीकी सहयोग देगी।
कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह ने कहा कि ई-सारथी डिजिटल रेफरल व्यवस्था से गंभीर मरीजों को समय पर उचित चिकित्सा संस्थान तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। दूसरे अस्पताल में मरीज भेजने से पहले वहां बिस्तर और विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता की जानकारी मिलने से अनावश्यक भटकाव कम होगा और उपचार में देरी रोकने में सहायता मिलेगी। सैफई विश्वविद्यालय को नोडल केंद्र की जिम्मेदारी मिलना महत्वपूर्ण है।
विश्वविद्यालय संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने में अपनी भूमिका निभाएगा। पायलट परियोजना के अनुभवों के आधार पर कमियों को दूर कर व्यवस्था को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि इसका लाभ जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच सके।
