Etawah Safari Park: इटावा सफारी पार्क में क्या-क्या है? 424 वन्यजीव और 22 शेर, जानें टिकट से लेकर घूमने तक की पूरी जानकारी
इटावा सफारी पार्क में पिछले तीन सालों में वन्यजीवों की संख्या में 139 की वृद्धि हुई है, जो कुल 424 ...और पढ़ें

इटावा सफारी पार्क में शेरनी नीरजा अपने शावकों के साथ। सफारी पार्क
HighLights
सफारी में गूंज रही वन्यजीवों के बढ़ते कुनबे की दहाड़, तीन साल में 139 वन्यजीव बढ़े
खुले और स्वछंद वातावरण में वन्यजीवों ने खुद को ढाला, प्राकृतिक प्रजनन से आगे बढ़ रहा कुनबा
शेरों से लेकर तेंदुए और काला हिरन तक बढ़ी संख्या, संरक्षण के लिहाज से संकेत सुखद
गौरव डुडेजा, इटावा। इटावा सफारी पार्क में वन्यजीवों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। खुले और स्वछंद वातावरण में वन्यजीवों ने यहां के माहौल को अपना लिया है। इसका असर उनके प्राकृतिक प्रजनन और लगातार बढ़ती संख्या में दिखाई दे रहा है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सफारी में वन्यजीवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 में जहां कुल 285 वन्यजीव थे, वहीं वर्ष 2025 में संख्या बढ़कर 351 और सितंबर 2026 तक 424 पहुंच गई। इस तरह तीन वर्षों में सफारी के वन्यजीव कुनबे में 139 की वृद्धि दर्ज हुई है।
सफारी में वन्यजीवों की बढ़ती संख्या की तस्वीर केवल कुल आंकड़े से नहीं, बल्कि अलग-अलग प्रजातियों में हो रहे बदलाव से भी स्पष्ट होती है। एशियाई शेर यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। इनके लिए सफारी का स्वछंद वातावरण प्राकृतिक व्यवहार और प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। सफारी प्रबंधन के अनुसार शेरों को यहां पर्याप्त खुला वातावरण मिला है। समय पर मेटिंग होने और शावकों के जन्म से कुनबा लगातार आगे बढ़ रहा है।

सफारी पार्क में तेंदुओं का झुंड एक साथ। सफारी पार्क
तेंदुओं के लिए भी सुरक्षित ठिकाना
इटावा सफारी पार्क में तेंदुओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि हुई है। इसका एक प्रमुख कारण प्रदेश के अलग-अलग जंगलों से रेस्क्यू किए गए तेंदुओं को यहां सुरक्षित वातावरण मिलना है। घायल अथवा बीमार हालत में रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को उपचार और देखभाल के बाद सफारी में रखा जाता है। यहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के कारण उनके उपचार और स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है। रेस्क्यू किए गए कई तेंदुए उपचार के बाद स्वस्थ होकर यहां रह रहे हैं। जंगलों से लाए गए इन वन्यजीवों के लिए सफारी का वातावरण सुरक्षित ठिकाना बन रहा है। इससे संरक्षण की दिशा में भी सफारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है।
खुले वातावरण में बढ़ा काला हिरन और चीतल का कुनबा
सफारी के खुले वातावरण का असर शाकाहारी वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। काला हिरन और चीतल ने यहां के वातावरण को तेजी से अपनाया है। पर्याप्त खुला क्षेत्र मिलने से इनके प्राकृतिक व्यवहार में किसी तरह का बड़ा बदलाव नहीं आया है। यही अनुकूलता इनके प्रजनन और बढ़ते कुनबे में दिखाई दे रही है। काला हिरन की संख्या में पिछले तीन वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। चीतलों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। इसी तरह सांभर के कुनबे में भी वृद्धि हुई है। बारहसिंघा की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि भालुओं की संख्या में वर्ष 2025 में बड़ा इजाफा हुआ और इसके बाद संख्या स्थिर रही।
संरक्षण के साथ प्रजनन पर भी जोर
इटावा सफारी में वन्यजीवों को केवल प्रदर्शित करने के बजाय उनके संरक्षण और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। सफारी में रहने वाले वन्यजीवों की नियमित देखभाल के साथ उनके स्वास्थ्य पर भी नजर रखी जाती है। रेस्क्यू होकर आने वाले वन्यजीवों के उपचार की व्यवस्था भी इसी संरक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है। सफारी प्रबंधन का मानना है कि किसी भी वन्यजीव के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उसकी सामान्य जीवन प्रक्रिया के लिए जरूरी है। जब उसे पर्याप्त स्थान और बेहतर देखभाल मिलती है तो वह धीरे-धीरे नए वातावरण में ढल जाता है।
पिछले तीन वर्षों में वन्यजीवों की संख्या में अच्छी खासी वृद्धि हुई है। सफारी के वन्यजीवों ने यहां के वातावरण के अनुरूप खुद को ढाल लिया है। अनुकूल वातावरण मिलने से उनका प्राकृतिक प्रजनन हो रहा है और वंश में लगातार वृद्धि हो रही है। यह वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से सुखद संकेत है।
डा. अनिल पटेल, निदेशक, इटावा सफारी पार्क
| एक नजर में तीन वर्षों का कुनबा | |||
|---|---|---|---|
| वन्यजीव | 2024 | 2025 | सितंबर 2026 |
| शेर | 15 | 19 | 22 |
| तेंदुआ | 15 | 21 | 33 |
| भालू | 1 | 6 | 6 |
| काला हिरन | 138 | 167 | 204 |
| चीतल | 97 | 118 | 137 |
| सांभर | 16 | 16 | 18 |
| बारहसिंघा | 3 | 4 | 4 |
| कुल वन्यजीव | 285 | 351 | 424 |
