संवादसूत्र, बकेवर : प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालयों में पेयजल के लिए हजारों रुपये खर्च करके शुरू की गई र¨नग वाटर व्यवस्था दम तोड़ने लगी है। अधिकांश विद्यालयों में हैंडपंपों में डाली गई सबमर्सिबल खराब होने से तो कहीं विद्युत कनेक्शन न होने से अभी तक र¨नग वाटर सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। विद्यालयों पर रखी पानी की टंकियां बच्चों को मुंह चिढ़ाने का काम कर रही हैं। सरकार द्वारा स्कूली बच्चों को स्वच्छ एवं साफ पानी मिले इसके लिए र¨नग वाटर सुविधा प्रारंभ कर जोरशोर से ग्राम पंचायतों को जिम्मा सौंपा गया। इसके तहत प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालयों में नया हैंडपंप जिसमें सबमर्सिबल तथा छत पर पानी की टंकी रखकर पाइप लाइन के जरिए टंकी में पानी भरने की व्यवस्था तथा पानी की टोंटियां लगवाई गईं थी। घटिया निर्माण सामग्री लगने के चलते एक भी बूंद पानी न मिलने से यह व्यवस्था दम तोड़ने लगी है। प्राथमिक विद्यालय लवेदी द्वितीय में तो सबमर्सिबल पंप पानी ही नहीं दे रहा है। यहां के बच्चों को दूर गांव में लगे हैंडपंप से पानी लाकर रसोइया बच्चों को पिलाने का काम करती है। प्राथमिक विद्यालय मलूपुर कृष्णपुर में विद्युत कनेक्शन न होने के कारण पानी निकलने से पहले लगाई गई टोंटियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कहीं-कहीं अभी तक र¨नग वाटर की फि¨टग ही आधी-अधूरी पड़ी है। ग्राम पंचायतों द्वारा नए हैंडपंपों की बो¨रग कराकर उसमें सबमर्सिबल पंप डालने के नाम पर हजारों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन पुराने ही हैंडपंपों से ही काम चलाया जा रहा है। यह एक जांच का विषय है।

Posted By: Jagran

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