अंतिम सांस तक सैफई से जुड़ा रहा राम गोविंद चौधरी का सियासी सफर, नेताजी के बाद संभाली चुनावी कमान
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का लखनऊ में निधन ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी। जागरण अर्काइव
HighLights
नेताजी के बाद संभाली चुनावी कमान, अखिलेश-शिवपाल को मंच पर लाने के बने साक्षी
मैनपुरी उपचुनाव में सैफई को केंद्र बनाकर संभाली डिंपल यादव के चुनाव प्रचार की बागडोर
लोकसभा चुनाव 2024 में इटावा और मैनपुरी के बूथ स्तर तक संगठन को किया मजबूत
वीपी सिंह यादव, सैफई (इटावा)। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ में बीमारी के चलते निधन हो गया। मूल रूप से बलिया निवासी राम गोविंद चौधरी का सैफई के साथ गहरा राजनीतिक और पारिवारिक नाता रहा। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ‘नेताजी’ के निधन के बाद उपजे राजनीतिक शून्य के बीच उन्होंने सैफई को अपनी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाकर पार्टी संगठन को नई दिशा दी।
वर्ष 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद रिक्त हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के दौरान सपा ने डिंपल यादव को सपा ने प्रत्याशी बनाया। इस दौरान 20 नवंबर 2022 को सैफई के एसएस मेमोरियल स्कूल में एक ऐतिहासिक जनसभा आयोजित हुई।
मंच पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव, प्रो. रामगोपाल यादव के साथ राम गोविंद चौधरी भी कंधे से कंधा मिलाकर बैठे थे। इसी मंच पर अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था, जिसने लंबे समय से चली आ रही पारिवारिक दूरियों को खत्म कर कार्यकर्ताओं में नया उत्साह फूंका।
मैनपुरी उपचुनाव में बूथ प्रबंधन की संभाली थी कमान
उपचुनाव के दौरान चौधरी ने सैफई में डेरा डालकर जसवंतनगर, करहल, मैनपुरी सदर, भोगांव और किशनी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी संगठन को सक्रिय किया। उन्होंने सैफई ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में जाकर सीधे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संवाद साधा, उनकी जमीनी समस्याएं सुनीं और रणनीति बनाकर शीर्ष नेतृत्व तक फीडबैक पहुंचाया।
2024 के चुनाव में भी निभाई रणनीतिक भूमिका
वर्ष 2024 के आम चुनाव में भी राम गोविंद चौधरी ने सैफई को ही अपना रणनीतिक केंद्र बनाए रखा। उन्होंने इटावा और मैनपुरी संसदीय सीटों के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कीं। उनका यह रिश्ता केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं था; वे अखिलेश यादव के हर सुख-दुख और पारिवारिक आयोजनों में एक वरिष्ठ अभिभावक की तरह उपस्थित रहते थे।
समाजवादी के प्रति समर्पण
उनके निधन की खबर मिलते ही सैफई और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं ने उनके साथ बिताए पलों और पुरानी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। आठ बार विधायक, अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और 2017 से 2022 तक नेता प्रतिपक्ष रहे राम गोविंद चौधरी के जाने से समाजवादी आंदोलन ने एक समर्पित और निष्ठावान सिपाही खो दिया है।
