पिता की मौत के बाद भी नहीं पसीजा बेटों का दिल, बोले- जरूरत थी तो घर से निकाला, अब उनसे मतलब नहीं
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में 70 वर्षीय राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद उनके शव को लेने कोई स्वजन नहीं पहुंचा।

बुजुर्ग का शव मोर्च्यूरी में रखा गया है।

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जागरण संवाददाता, इटावा। एक पिता की तबीयत बिगड़े तो बेटा उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए दौड़ता है, लेकिन उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के अस्पताल में सामने आया मामला रिश्तों की संवेदनाओं को झकझोरने वाला है।
एटा निवासी 70 वर्षीय राजकुमार सक्सेना की उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके बाद उनके शव को लेने के लिए अब तक कोई स्वजन नहीं पहुंचा है। पुलिस ने शव को स्वजन के आने की उम्मीद में 72 घंटे के लिए शवगृह में रखा है। 15 अगस्त को 72 घंटे पूरे होंगे, इसके बाद भी कोई स्वजन नहीं आया तो पुलिस द्वारा अंतिम संस्कार कराया जाएगा।
राजकुमार सक्सेना एटा जनपद के मारहरा के रहने वाले थे। करीब दो वर्ष पहले उन्हें एटा के एक वृद्धाश्रम में भर्ती कराया गया था। 16 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान 12 अगस्त को उनकी मौत हो गई।
उनके पास मिले दस्तावेजों और उनके द्वारा दी गई जानकारी से बेटे कुबेर सक्सेना का नाम और गाजियाबाद का पता मिला। मोबाइल पर संपर्क करने पर बेटे द्वारा राजकुमार को पहचानने से इन्कार करने और बाद में फोन नहीं उठाने की बात सामने आई।
रक्तदाता समूह के शरद तिवारी ने शुरू की स्वजन की तलाश
राजकुमार की मौत के बाद जब अस्पताल में उनके साथ कोई स्वजन नहीं मिला तो इसकी जानकारी रक्तदाता समूह के पदाधिकारियों को दी गई।
इसके बाद रक्तदाता समूह के शरद तिवारी ने मामले की तहकीकात और स्वजन की तलाश में सबसे मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के आधार पर परिवार से संपर्क करने का प्रयास किया। इसके बाद समूह के अन्य सदस्यों के साथ मृतक के स्वजन का पता लगाने की कोशिश की गई।
राजकुमार के भतीजे पंकज सक्सेना से भी संपर्क हुआ। उन्होंने परिवार से जुड़ी जानकारी दी। उनके अनुसार राजकुमार के तीन बेटे हैं।
कुबेर सक्सेना (32), भारत सक्सेना (28) और धादू सक्सेना (25) गाजियाबाद में रहते हैं। कुबेर कार किराये पर चलाते हैं, भारत मोबाइल की दुकान और धादू किराने की दुकान करते हैं। राजकुमार की एक बेटी भी है, जिसकी शादी हो चुकी है। उनकी पत्नी भी जीवित हैं और बच्चों के साथ गाजियाबाद में रहती हैं।
गाजियाबाद के घर पर मिला ताला, बेटे से नहीं हो सका संपर्क
रक्तदाता समूह के सदस्य राजकुमार के दस्तावेजों में दर्ज नंदग्राम, दीनदयालपुर, गाजियाबाद स्थित आवास पर पता किया तो वहां ताला मिला। पड़ोसियों ने मकान कुबेर सक्सेना का होने की पुष्टि की। पुलिस टीम ने भी वहां संपर्क किया, लेकिन कुबेर नहीं मिले।
इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के काउंसलर डॉ. मनोज मौर्य ने भी फोन पर बात करने के दौरान बेटे को समझाने का प्रयास किया। रक्तदाता समूह के सदस्यों ने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अपील की, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार बेटे ने पिता का चेहरा तक देखने से इन्कार कर दिया।
पंकज सक्सेना द्वारा मिली जानकारी के अनुसार राजकुमार के पिता एटा कोर्ट में मुंशी थे और उनके पास जमीन भी थी। राजकुमार के नियमित काम न करने और परिवार से रुपये मांगने तथा विवाद रहने की भी बात सामने आई है। हालांकि इन पारिवारिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पीजीआई चौकी प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार ने बुधवार को शव का पंचनामा अज्ञात में भरकर शवगृह में रखवाया। पुलिस के अनुसार शव को 72 घंटे तक इस उम्मीद में रखा गया है कि कोई स्वजन पहुंचकर पहचान कर ले और अंतिम संस्कार करे। 15 अगस्त को 72 घंटे पूरे होंगे। इसके बाद भी कोई नहीं आया तो नियमानुसार पुलिस द्वारा अंतिम संस्कार कराया जाएगा।
