संवादसूत्र, बकेवर : किसानों को खेत में खाद डालने के लिए अब यूरिया व डीएपी खाद बोतल में मिलेगी। बोरियों में आने वाली यह खाद अब बंद हो जाएगी। कीटनाशक की तरह बोतल में बंद तरल पदार्थ के रूप में नैनो यूरिया व डीएपी किसानों को मिला करेगी। यूरिया खाद तो लिक्विड में आ भी चुकी है परंतु किसान अभी उसके प्रति आकर्षित नहीं है। नैनो डीएपी के अगले वर्ष तक आने की संभावना है। कृषि व सहकारिता विभाग के अधिकारी डीएपी खाद के भी लिक्विड में जल्द ही आना बता रहे हैं। किसानों को फसलों की बुवाई के समय मिलने वाली डीएपी व यूरिया खाद जो पहले पाली बैग में 45 से 50 किलोग्राम वजन में मिलती थी। वह किसानों को अब आधा लीटर की बोतल में लिक्विड में मिलेगी। इफको के प्लांट में नैनो यूरिया खाद का उत्पादन होकर आ भी चुका है और उसका प्रोडक्शन सहकारी समितियों पर भेजा भी जा चुका है परंतु किसान अभी उस नैनो यूरिया खाद को लेने के प्रति जागरूक नहीं है। एक बोरी यूरिया डीएपी खाद एक एकड़ के हिसाब से होती थी वहीं बोतल में 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया एक एकड़ जमीन के हिसाब से मिल रही है। आधा लीटर की नैनो यूरिया बोतल की कीमत 240 रुपये है। जबकि एक बोरी यूरिया 266 रुपये 50 पैसे की मिलती है। आगामी रबी की फसल की बोआई के समय तक नैनो डीएपी खाद भी किसानों को मिलना शुरु हो जाएगी। मालभाड़ा खर्च होगा कम नैनो यूरिया व डीएपी आने से सरकार का ट्रांसपोटेशन पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा। पालीबैग में आने वाली यूरिया व डीएपी खाद पर सहकारिता विभाग को पीसीएफ को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लदान और कंपनी से ट्रेन व ट्रकों के द्वारा गोदामों तक भंडारण के लिए कई जगह की व्यवस्था पर खर्च करना पड़ता है जो नैनो खाद के आने से काफी कम हो जाएगा। करोड़ों की सब्सिडी होगी बंद अभी यूरिया व डीएपी खाद किसानों को देने में प्रदेश सरकार को करीब 600 रुपये से तीन हजार तक कि सब्सिडी कंपनी को देनी पड़ती है जो सरकार पर एक तरह से बोझ के तौर पर ही देखी जाती है लेकिन नैनो यूरिया व डीएपी खाद आने से सरकार सब्सिडी बंद कर देगी। लिक्विड नैनो यूरिया खाद आ चुकी है जो कई केंद्रों पर बिकने लगी है। नैनो डीएपी भी जल्द आएगी। इस नैनो खाद से सब्सिडी में व ट्रांसपोटेशन पर होने वाले खर्च से बचा जा सकेगा। लिक्विड नैनो यूरिया का प्रयोग फसल के लिए काफी लाभदायक है।

- अभिनंदन सिंह उप कृषि निदेशक

Edited By: Jagran