संवाद सहयोगी, सैफई : उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में रोगियों को बीते 15 सालों से बिना टेंडर के आहार देने वाली फर्म का सेवा विस्तार देने के मामले में शासन की जांच के बाद 14 अधिकारियों को दोषी पाया गया था। शासन ने इन सभी के खिलाफ कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं। इसी कड़ी में वित्त निदेशक ने बीते 23 दिसम्बर को जैम पोर्टल पर पेशेंट किचेन के नए टेंडर को अपलोड कर दिया। टेंडर अपलोड करने की अंतिम तिथि 13 जनवरी रखी गई है। इससे आगामी पखवारे में किसी फर्म को आहार वितरण का कार्य मिलेगा।

शासन की जांच में वर्ष 2006 से लगातार एक ही फर्म रोगियों को आहार देने का ठेका चलाती आ रही है। शासनादेश के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में यह टेंडर जारी किया गया है।

इससे पूर्व विश्वविद्यालय में सफाई कार्य देखने वाली फर्म का भी 13 साल बाद नया टेंडर हुआ था। 2019 में विश्वविद्यालय में 13 सालों से सफाई ठेके की फर्म साबरीन चौधरी पर करोड़ो के ईपीएफ घोटाले का आरोप लगाने के बाद फर्म ब्लेक लिस्टिड कर एफ आई आर दर्ज कराई गई थी। जिसकी आज भी जांच सीबीसीआइडी के यहां प्रचलित है। हाल में यूएमएस में पानी मिला खून और पेसमेकर खरीद गड़बड़ी को लेकर यूएमएस की छवि को काफी क्षति पहुंचाई जा रही है। इतना सब होने के बावजूद ऐसे दोषियों के खिलाफ अभी तक कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर डा. रमाकांत यादव का कहना है शासन के निर्देशानुसार नियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। जैम पोर्टल पर नया टेंडर जारी कर दिया गया है निर्धारित तारीख पर कमेटी के माध्यम से टेंडर खोला जाएगा। सभी दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।

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