जासं, इटावा : कोरोना संकट काल में जिदंगी न्यूनतम जरूरतों तक सिमट गई तो अनलॉक में भी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। लॉकडाउन से ही आसमान चढ़ी सब्जियों के भाव अनलॉक में भी गिरे नहीं हैं। मसलन सब्जियों का राजा आलू 30 से 40 रुपये किलो भाव पर ही टिका है। अमूमन कई हरी सब्जियों के भाव भी 30 रुपये किलो से ऊपर चल रहे हैं। ऐसे में आम आदमी की थाली से सब्जियां तो पहले से ही गायब हो रही थीं, अब इसी राह पर दालें भी निकल पड़ी हैं। सब्जियों के बाद अब दालें शहरवासियों का बजट बिगाड़ने लगी हैं। चना दाल के बाद अरहर में भी तेजी आनी शुरू हो गई है। देखते-देखते अन्य दालें भी महंगी होनी शुरू हो गई हैं। यदि सरकार ने जल्द कदम न उठाए तो मुनाफाखोर सक्रिय हो सकते हैं। दालों में प्रमुख स्थान रखने वाली अरहर दाल के भाव में एक माह के भीतर 20 रुपये प्रतिकिलों का उछाल आया है। मटर का भाव कभी भी 25-30 रुपये प्रतिकिलो से ऊपर नहीं जाता था, यह भी रिकार्ड 75 रुपये प्रतिकिलो के भाव पर मिल रही है। आढ़तियों के अनुसार चने की महंगाई का असर चना दाल पर आया है। एक माह के भीतर चना दाल का थोक भाव 50 से 64 रुपये प्रतिकिलो हुआ है। केवल मूंग दाल का भाव स्थिर है। चना और मटर की तेजी का असर काबुली चना पर भी पड़ा है। विकल्प में बढ़ी मांग ने मध्यम गुणवत्ता के काबुली चना को 1000 रुपये क्विटल महंगा कर 7600 रुपये क्विटल के स्तर पर पहुंचा दिया है। वायदा बाजार के हवाले दालों के दाम व्यापार मंडल (श्याम बिहारी मिश्रा गुट) के जिला महामंत्री सदाशिव श्रीवास्तव बताते हैं कि दालों के भाव व्यापारी के बजाय वायदा बाजार के हवाले हो गए हैं। इसके अलावा दालों पर महंगाई के अन्य कारण भी हैं। मसलन, लॉकडाउन में कारखाने बंद रहे, उत्पादन नहीं हो पाया। दुकानों के पुराने स्टॉक भी खाली होने लगे हैं। नई खरीदारी महंगी हो रही है। इन हालातों में दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। दालों की नई उपज आने में करीब तीन माह का इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में खासकर अरहर दाल और उछाल मार सकती है। सरकार को दाल के दाम नियंत्रित करने के लिए तुरंत प्रभाव से कदम उठाने चाहिए। दालों के फुटकर भाव में अंतर प्रतिकिलो

जिस मौजूदा भाव एक माह पहले

अरहर दाल 100 80

उड़द दाल 125 105

मूंग दाल 75 75

चना दाल 64 50

काबुली चना 76 65 सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। प्याज दो माह पहले 10 से 15 रुपये किलो मिल रहा था, अब 50 रुपये किलो मिल रहा है। वहीं आलू 35 रुपये किलो के भाव पर टिका है। इससे रसोई का बजट बिगड़ रहा है। धनिया मिर्च के भाव भी चौंकाते हैं।

-सुधा पांडे, हनुमान गली भरथना सब्जियों की महंगाई से रसोई का बजट बिगड़ रहा है। पहले हरी सब्जी सस्ती मिल जाया करती थी लेकिन अब दिन पर दिन महंगी होती जा रही है। तुरई अब 30 रुपये किलो तो लौकी 20 रुपये किलो तथा मूली पालक 40 रुपये किलो, टमाटर 50 रुपये किलो मिलने से रसोई का बजट संतुलित रखना मुश्किल है।

-पूनम पोरवाल, महावीर नगर

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