इटावा, जागरण संवाददाता: सांप ने खेत में काट लिया और किसान की तबीयत बिगड़ गई और मौत हो गई तो बीमा कंपनी ने उसका मुआवजा नहीं दिया। मृतक की पत्नी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली, जिस पर आयोग ने बीमा कंपनी को पांच लाख रुपये का मुआवजा लाभार्थी को देने का निर्देश दिया। 

किसान सुरेंद्र सिंह निवासी चंपानेर संतोषपुर घाट थाना बसरेहर की पत्नी ऊषा देवी ने बताया कि शासन ने कृषक खातेदारों का दुर्घटनात्मक बीमा पांच लाख रुपये का किया था। यह बीमा ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी से किया गया था। उनके पति सुरेंद्र सिंह को सात अगस्त 2018 को खेत पर कृषि कार्य करते समय सांप ने काट लिया था। उनका उपचार जेके अस्पताल में हुआ था और उनकी हालत खराब होने पर सदर अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। वहां पर उनकी मौत हो गई। किसान को जिस समय समय सांप ने काटा, उनकी आयु 55 वर्ष की थी।

ऊषा ने सभी औपचारिकताएं पूरी करके बीमा कंपनी के शाखा कार्यालय में फार्म जमा कर दिया था, परंतु उसका क्लेम नहीं मिला। एक जुलाई 2019 को उन्हें बताया गया कि बीमा धनराशि नहीं मिलेगी क्योंकि सुरेंद्र सिंह को सांप ने काटा है। परंतु मृत्यु का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं लिखा है। 

बीमा कंपनी ने नौ माह तक कोई सूचना उसे नहीं दी, जिस कारण उसने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। इस संबंध में बीमा कंपनी ने आयोग में अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऊषा देवी के पति सुरेंद्र की मृत्यु सांप के काटे जाने से स्वीकार नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं है और न ही बिसरा रिपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत की गई। 

अधिवक्ता अनिल कुमार यादव ने बताया कि आयोग के अध्यक्ष गुलाब सिंह, सदस्य शालिनी गुप्ता व सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने ऊषा देवी के पति को सांप से काटे जाने पर मौत होना स्वीकार किया है और बीमा कंपनी को समाजवादी किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 25 अगस्त 2022 को दिया गया है। इस फैसले से परिवार ने राहत की सांस ली है।

Edited By: Shivam Yadav

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