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ऑनलाइन पढ़ाई और अटूट लगन... इटावा के सुलभ सिंह का MBBS में चयन, दिव्यांग मां का पूरा किया सपना

Published: Tue, 22 Sep 2026 03:36 PM (IST)Updated: Tue, 22 Sep 2026 03:40 PM (IST)

इटावा के निजी आईटीआई शिक्षक सुरेंद्र सिंह के बेटे सुलभ का तीसरे प्रयास में एमबीबीएस में चयन हो गया है, जिससे परिवार में खुशी का माहौल है।

छात्र सुलभ के साथ उसकी माता हेम लता और पिता सुरेंद्र सिंह

छात्र सुलभ के साथ उसकी माता हेम लता और पिता सुरेंद्र सिंह

HighLights

  1. शिक्षक के बेटे सुलभ का एमबीबीएस में चयन, परिवार में खुशी।

  2. तीसरे प्रयास में घर से ऑनलाइन पढ़ाई कर पाई सफलता।

  3. दिव्यांग मां के अटूट सहयोग से सुलभ ने सपना पूरा किया।

संवाद सहयोगी इटावा। मोहल्ला मोहन की मढ़ैया निवासी निजी आईटीआई स्कूल शिक्षक सुरेंद्र सिंह के इकलौते बेटे सुलभ का एमबीबीएस में चयन हो गया है। सुलभ को ऑल इंडिया कोटा के जरिए मध्य प्रदेश के देवास स्थित जीएमसी में एमबीबीएस में एडमिशन मिला है। इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है और बधाई देने वालों का घर पर तांता लगा हुआ है।

सुलभ के पिता सुरेंद्र सिंह फिरोजाबाद के एक आईटीआई स्कूल में निजी शिक्षक हैं। वह इसी आय से परिवार का गुजारा करते हैं। उन्होंने बताया कि सुलभ ने हाईस्कूल की पढ़ाई जसवंतनगर के सेंट पीटर्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की थी। इसके बाद वह कोटा के एलन कोचिंग सेंटर में 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए चला गया था।

कोरोना काल में कोचिंग सेंटर बंद होने से सुलभ की पढ़ाई पर असर पड़ा। इस दौरान उसने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखी। पिता ने बताया कि कोटा में पढ़ाई और रहने का खर्च ज्यादा था। आर्थिक हालात को देखते हुए सुलभ ने आगे की तैयारी घर से ही करने का फैसला किया।

तीसरे प्रयास में पाई नीट परीक्षा में सफलता

इंटरमीडिएट के बाद सुलभ का पूरा ध्यान एमबीबीएस डॉक्टर बनने पर था। उसने बीएससी में एडमिशन नहीं लिया और घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यम से 'फिजिक्स वाला' का कोर्स किया। पिता के मुताबिक, सुलभ रोजाना करीब 10 से 12 घंटे पढ़ाई करता था। उसने नीट परीक्षा में तीसरे प्रयास में यह सफलता पाई है।

सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सुलभ की मां हेमलता हाथ से करीब 70 प्रतिशत दिव्यांग हैं। इसके बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में पूरा साथ दिया। सुलभ की एक शादीशुदा बहन भी है। बेटे के एमबीबीएस में चयन की खबर मिलते ही रिश्तेदारों, जान-पहचान वालों और इलाके के लोगों ने घर पहुंचकर परिवार को बधाई दी।

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