विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'पाप' धोने को धार्मिक कार्यों में लगाते थे लूट की कमाई, इटावा मुठभेड़ में अंतरराज्यीय 'पंखिया गैंग' का पर्दाफाश

Published: Wed, 23 Sep 2026 12:46 AM (IST)

अंतरराज्यीय पंखिया गैंग, जो चोरी और लूट की कमाई का एक हिस्सा धार्मिक कार्यों में लगाता था, इटावा पुलिस की ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. पंखिया गैंग लूट की कमाई धार्मिक कार्यों में लगाता था।

  2. इटावा पुलिस ने मुठभेड़ में छह सदस्यों को गिरफ्तार किया।

  3. गिरोह पर 86 मुकदमे दर्ज, अवैध संपत्ति जब्त होगी।

जागरण संवाददाता, इटावा। देश भर में चोरी और लूट की वारदात करने वाला अंतरराज्यीय ‘पंखिया गैंग’ सिर्फ अपराध ही नहीं करता, अपराध का पाप न लगे, इसका भी रास्ता खोजता। पाप का बोझ हल्का करने के लिए यह गिरोह लूट-चोरी के माल से मिली रकम का बड़ा हिस्सा धार्मिक कार्यों, मंदिरों में चढ़ावे और अपने पुराने गुरुओं यानी गैंग के वरिष्ठ सदस्यों के जीविकोपार्जन पर खर्च करता था।

इस 'विश्वास' के साथ कि अपराध की कमाई में से कुछ हिस्सा धर्म-कर्म में लगाने से उनके पाप धुल जाएंगे। हालांकि, अधर्म की कमाई से धर्म का यह ढोंग भी उन्हें बचा न सका और इटावा पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पूरे गिरोह का भंडाफोड़ हो गया। सोमवार रात ग्वालियर बाईपास रोड पर चेकिंग के दौरान पुलिस टीम को देखकर एक्सयूवी-500 कार में सवार बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जवाबी कार्रवाई करके पंखिया गैंग के सरगना समेत छह को धर दबोचा।

बदमाशों के कब्जे से पुलिस ने 135 ग्राम से अधिक सोना, करीब डेढ़ किलो चांदी के बिस्किट और आभूषण, 32 हजार रुपये नकद, दो तमंचे, कारतूस बरामद हुए। गिरफ्तार किए गए बदमाशों का लंबा आपराधिक इतिहास है, इन सभी पर मिलाकर कुल 86 मुकदमे दर्ज हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गिरफ्तार सरगना रमेश कश्यप, मुनीश कुमार जाटव, अनीस अहमद, वसीम, मुकद्दर अली उर्फ पंखिया व इरफान अहमद बदायू में रहते हैं।

इनका मूल निवास बरेली व शाहजहांपुर की सीमा पर स्थित पंखियाखेड़ा गांव है। इनकी जाति पंखिया होने के कारण ही इस गिरोह का नाम पंखिया गैंग पड़ा। इनके पूर्वज जंगलों में शहद निकालकर अपना गुजर-बसर करते थे, लेकिन जल्द अमीर बनने के चक्कर में इनकी पीढ़ियां लूट व चोरी के रास्ते पर चल पड़ीं। इन्होंने चोरी का माल आसानी से खपाने के लिए गैंग में एक सुनार अनीस को भी शामिल कर रखा था, जो सैलून चलाने की आड़ में चोरी के गहने बिकवाता था।

सरगना की पत्नी मोरकली प्रधान रही है। गैंग का काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। ये किराये की गाड़ियों से हाईवे या मुख्य सड़कों के किनारे बने मकानों को निशाना बनाते थे। एक-दूसरे के कंधों का सहारा लेकर छत के रास्ते घर में दाखिल होते, चेहरे कपड़े से ढके रहते और कोई खतरा दिखता तो बाहर मुस्तैद साथी चिड़ियों जैसी आवाज निकालकर बाकी सदस्यों को सतर्क कर देता था।

लखनऊ, आगरा, मथुरा, मुजफ्फरनगर, हरदोई, कुशीनगर, पीलीभीत और शाहजहांपुर जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य राजस्थान तक में चोरियां करने वाले इस गिरोह पर अब पुलिस गैंग्सटर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई कर इनकी अवैध संपत्तियों को जब्त करने जा रही है। सफलता हासिल करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

यह भी पढ़ें- OPD List: कानपुर, उन्नाव सहित 13 जिलों के प्रमुख अस्पतालों की ओपीडी सूची, आज 23 सितंबर को कौन से डॉक्टर रहेंगे उपलब्ध