Etawah DFO Passes Away: पापा लौट आओ... इटावा डीएफओ पिता की सीने से तस्वीर लगाए फफक पड़ी बेटी
इटावा के जिला वन अधिकारी विकास नायक के सड़क हादसे में निधन के बाद, उनकी बेटी सोनू पोस्टमार्टम हाउस पर ...और पढ़ें

डीएफओ की पत्नी अंजू व बेटियां सोनू व मोनिका को लेकर आते मामा रामेश्वर लाल। जागरण
HighLights
बेटी सोनू ने पिता विकास नायक की तस्वीर सीने से लगाई
इटावा डीएफओ विकास नायक का सड़क हादसे में निधन हुआ
अभावों से निकलकर भारतीय वन सेवा अधिकारी बने थे विकास
वीपी सिंह यादव, सैफई (इटावा)। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बुधवार सुबह एक बेटी अपने पिता की तस्वीर सीने से लगाए फफक रही थी। कभी तस्वीर को निहारती तो कभी उसे सीने से लगा लेती। पिता सामने नहीं थे, लेकिन उनकी तस्वीर को छोड़ने को तैयार नहीं थी।
यह दृश्य था इटावा के जिला वन अधिकारी विकास नायक के परिवार का। सात वर्ष की उम्र में सड़क हादसे में पिता को खोने वाले विकास ने अभावों के बीच पढ़ाई की और भारतीय वन सेवा में पहुंचकर परिवार का नाम रोशन किया। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव पैतृक गांव के लिए ले जाया गया तो वर्षों के संघर्ष से बनी सफलता की कहानी आंसुओं में बदल गई।
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले की लाडनूं तहसील के गांव मंगलपुर निवासी विकास नायक के पिता श्रवण नायक का सड़क हादसे में निधन हो गया था। उस समय विकास महज सात वर्ष के थे। तीन भाइयों में सबसे बड़े भाई का बाद में बीमारी के कारण निधन हो गया। इसके बाद विकास परिवार में सबसे बड़े रह गए। उनसे छोटे भाई लक्ष्मण घर पर रहकर खेती-किसानी करते हैं।
पति के निधन के बाद मां सुगना नायक के सामने दोनों बेटों की परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी थी। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। सुगना ने मेहनत-मजदूरी कर दोनों बेटों को पढ़ाया। आर्थिक तंगी के कारण विकास और लक्ष्मण की करीब 18 वर्ष की उम्र में ही शादी कर दी गई थी। विकास की शादी अंजू से हुई तो लक्ष्मण की शादी अंजू की सगी बहन पूजा से कर दी गई। इस तरह दोनों भाइयों की शादी सगी बहनों से हुई।
विकास के प्राथमिक शिक्षा के शिक्षक और पारिवारिक गुरु राजेंद्र टोंक भी बुधवार को सैफई पहुंचे। प्राथमिक शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त राजेंद्र टोंक ने बताया कि उन्होंने विकास को कक्षा एक से पांच तक स्वयं पढ़ाया था। विकास शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और मेहनती थे। प्राथमिक शिक्षा के बाद उन्होंने राजकीय जौहरी स्कूल से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद आइआइटी की पढ़ाई पूरी की और कुछ समय निजी कंपनी में नौकरी की।
निजी कंपनी में नौकरी के दौरान भी विकास का लक्ष्य अधिकारी बनना था। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी। वर्ष 2019 में भारतीय वन सेवा में चयन हुआ। अधिकारी बनने के बाद उनकी तैनाती फिरोजाबाद में हुई। जून 2025 में स्थानांतरण के बाद उन्होंने इटावा के जिला वन अधिकारी का पद संभाला। अभावों में पले विकास के लिए यह उपलब्धि केवल नौकरी नहीं, बल्कि मां के संघर्ष और परिवार की उम्मीदों का परिणाम थी।
विकास का परिवार राजस्थान के सीकर में रहता था। पत्नी अंजू अपनी दोनों बेटियों के साथ वहीं रहती थीं। बड़ी बेटी सोनू करीब 17 बर्षीय है और सीकर में आइआइटी की तैयारी कर रही है। छोटी बेटी मोनिका करीब 15 बर्षीय है। पिता से दोनों बेटियों का गहरा लगाव था।
हादसे की खबर के बाद सैफई पहुंची सोनू बुधवार को पूरे समय पिता की तस्वीर अपने सीने से लगाए रही। वह बार-बार तस्वीर को देखती और फिर सीने से लगाकर फफक पड़ती। पिता की तस्वीर ही उसके पास उनकी आखिरी निशानी रह गई थी।
रोज बात होती थी, नहीं सोचा था यूं छोड़ जाएंगे विकास
पोस्टमार्टम हाउस पर डीएम शुभ्रांत शुक्ल और एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव के साथ लखनऊ के डीएफओ सुधांशु पांडे, झांसी के एडीएफओ विकास यादव समेत वन विभाग के अन्य आला अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के बीच विकास नायक को लेकर काफी देर तक चर्चा होती रही। डीएम और एसएसपी एक-दूसरे से कह रहे थे कि विकास से लगभग रोज बातचीत होती थी। कभी नहीं सोचा था कि इस तरह की घटना हो जाएगी। दोनों अधिकारी काफी दुखी नजर आए।
पिता की तस्वीर से लिपटकर रोती रही बड़ी बेटी
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विकास नायक का शव एंबुलेंस में रखा जा रहा था। उस समय बेटी सोनू पिता की तस्वीर सीने से लगाए खड़ी थी। वह बार-बार तस्वीर को देखती और उसे सीने से लगा लेती। कुछ देर बाद एंबुलेंस में रखा पिता का शव उसके सामने से गुजरने लगा तो सोनू फफक पड़ी। आसपास खड़े वन विभाग और पुलिस के अधिकारी भी यह दृश्य देखकर भावुक हो गए। कई अधिकारी खुद को संभाल नहीं सके।
