इटावा में मिलावटी दूध बेचने के मामले में 17 साल बाद आया फैसला, दो आरोपियों को एक-एक साल की सजा
इटावा में मिलावटी दूध बेचने के मामले में 17 साल 332 दिन बाद दुकान मालिक और कर्मचारी को दोषी ठहराया गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
मिलावटी दूध बेचने के मामले में 17 साल बाद आया फैसला।
दुकान मालिक व कर्मचारी को एक वर्ष का कारावास।
न्यायालय ने एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
संवाद सहयोगी, इटावा। मिलावटी दूध बेचने के मामले में 17 साल 332 दिन बाद शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने दुकान स्वामी और उसके कर्मचारी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोनों को एक-एक वर्ष के साधारण कारावास के साथ एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दोनों को 15-15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा मिलावट खोरी के खिलाफ चलाए गए जांच अभियान के तहत 5 अक्टूबर 2008 को ग्राम सलेमपुर स्थित शिवराज सिंह की दुकान पर छापा मारा गया था।
इस दौरान दूध का नमूना लिया गया, जिसे मुख्य खाद्य निरीक्षक अवधेश कुमार ने 6 अक्टूबर 2008 को जांच के लिए पब्लिक एनालिस्ट के पास भेजा। खाद्य विश्लेषण रिपोर्ट में दूध का नमूना अपमिश्रित पाए जाने पर दुकान स्वामी शिवराज सिंह और उसके कर्मचारी अशोक कुमार सविता के खिलाफ थाना जसवंतनगर में मुकदमा दर्ज कराया गया।
एक-एक हजार रुपये का लगाया अर्थदंड
एडीएम न्यायालय में दोनों के खिलाफ खाद्य पदार्थों में मिलावट या प्रतिबंधित वस्तुओं के निर्माण, बिक्री और भंडारण का मामला दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवधेश कुमार और पब्लिक एनालिस्ट नवीन मल्होत्रा को गवाह के रूप में पेश किया गया।
इसके अलावा खाद्य विश्लेषण रिपोर्ट, नमूना संबंधी प्रपत्र, रसीद, तहरीर तथा अभियोजन स्वीकृति समेत आठ अभिलेखीय साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर गुरुवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम शशि कुमार ने दोनों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए एक-एक वर्ष की सजा सुनाई और एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को 15-15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
